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| CBI का धनबाद स्थित कार्यालय। |
95 लाख के नोटिस को सेटल करने को मांगी थी घूस
मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई बिरनी प्रखंड के खाखीपीपर निवासी राजू अंसारी की शिकायत पर की गई। पीड़ित का आरोप है कि साल 2023 में उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) अनीश कुमार सेठ और जीएसटी कार्यालय के इन दोनों अधिकारियों ने कथित तौर पर एक साजिश रची। इसके तहत पीड़ित को 95 लाख रुपये का जीएसटी टैक्स जमा करने का फर्जी डर दिखाकर लगातार तीन बार नोटिस भेजे गए।
जब पीड़ित असलियत जानने जीएसटी दफ्तर पहुंचा, तो उसे धोखाधड़ी का अहसास हुआ। इसके बाद मामले को रफा-दफा करने के नाम पर अधिकारियों और सीए ने 90 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
सीबीआई के जाल में ऐसे फंसे अधिकारी
परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीधे धनबाद स्थित सीबीआई कार्यालय में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। सीबीआई के निर्देश पर जाल बिछाया गया और मोलजोल कर घूस की रकम 65 हजार रुपये तय हुई।
केमिकल लगे नोट : योजना के तहत बुधवार को राजू अंसारी 50 हजार रुपये लेकर गिरिडीह सेंट्रल जीएसटी कार्यालय पहुंचे।
सीधे हाथ में नहीं ली रकम : चालाकी बरतते हुए अधिकारियों ने रिश्वत के पैसे सीधे हाथ में न लेकर, एक बिचौलिए के माध्यम से मंगवाए और उसे सीधे सुपरिटेंडेंट के घर भिजवा दिया।
13 घंटे की पूछताछ : सीबीआई इंस्पेक्टर रघुनाथ कुमार के नेतृत्व में पहुंची टीम ने तत्काल जाल बिछाया। करीब 13 घंटे तक चली कड़ी पूछताछ और दबाव के बाद सुपरिटेंडेंट के घर से घूस की रकम बरामद की गई। नोटों पर लगे विशेष केमिकल टेस्ट की पुष्टि होते ही सीबीआई ने दोनों अधिकारियों को हिरासत में ले लिया।
विदाई से पहले सलाखों के पीछे पहुंचे सुपरिटेंडेंट
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार सुपरिटेंडेंट बुद्धेश्वर सुंडी का जल्द ही रिटायरमेंट होने वाला था और जमशेदपुर में उनके लिए एक भव्य फेयरवेल (विदाई) कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं। लेकिन विदाई से ठीक पहले सीबीआई की इस कार्रवाई ने न सिर्फ अधिकारी के करियर पर दाग लगा दिया, बल्कि पूरे जीएसटी विभाग को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सीबीआई मामले में संलिप्त सीए की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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