सिल्ली (रांची) : क्षेत्र में विकास के नाम पर रैयतों की अनदेखी विधायक अमित महतो को रास नहीं आई। मंगलवार को गोला-मुरी सड़क चौड़ीकरण के काम का जायजा लेने पहुंचे विधायक अचानक 'एक्शन मोड' में नजर आए। वे जमीन का मुआवजा नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों के समर्थन में उतरे और निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया। विधायक ने निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों से दो-टूक कहा कि जब तक विधिवत प्रक्रियाएं पूरी नहीं होतीं और एक-एक रैयत को उनके हक का मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक यहां एक ईंट भी नहीं रखी जाएगी।
निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों से बात करते विधायक अमित महतो।
बिना नोटिस और ग्रामसभा के शुरू हुआ काम
विधायक अमित महतो ने निर्माण कंपनी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे कंपनी की 'दादागिरी' करार देते हुए निम्नलिखित अनियमितताओं को रेखांकित किया...
करोड़ों की योजना, मुआवजे का पता नहीं : 333 करोड़ रुपए की इस बड़ी परियोजना में रैयतों को बिना भुगतान किए ही जमीन पर काम शुरू कर दिया गया।
नियमों की अनदेखी : भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत किसी भी रैयत को अब तक कोई नोटिस नहीं दिया गया है।
ग्राम सभा को ठेंगा : सड़क चौड़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए अनिवार्य ग्राम सभा की अनुमति तक नहीं ली गई।
गोपनीयता का खेल : साइट पर न तो निर्माण एजेंसी का नाम लिखा है, न ही लागत या काम की अवधि का कोई बोर्ड लगाया गया है।
झामुमो कार्यकर्ताओं ने मशीनों को खदेड़ा
विधायक के तेवर देखते ही झामुमो कार्यकर्ता भी उग्र हो गए। सड़क निर्माण में जुटी मशीनों और गाड़ियों को मौके से हटा दिया गया। कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया कि जब तक पारदर्शिता नहीं बरती जाएगी, काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
कंपनी की चुप्पी : हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी परियोजना चला रही कंपनी ने अपनी पहचान उजागर करने वाला कोई बोर्ड नहीं लगाया है। मौके पर मौजूद प्रोजेक्ट इंचार्ज भी इस मामले में कुछ भी ठोस कहने से बचते नजर आए। हालांकि, प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वर्क ऑर्डर जारी किया जा चुका है, लेकिन जमीन अधिग्रहण की कानूनी अड़चनों ने अब विवाद खड़ा कर दिया है।
बिना मुआवजा दिए काम शुरू करना रैयतों के साथ अन्याय है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर किसी भी कंपनी को मनमानी करने की छूट नहीं दी जाएगी। -अमित महतो, विधायक, सिल्ली
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