जयपुर से किबिथू तक 7800 किमी का सफर; कहा- बाधाएं नहीं, संकल्प तय करता है मंजिल
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| आशा मालवीय का स्वागत करते सीसीएल के अधिकारी। |
2 साल की उम्र में पिता को खोया, हिम्मत नहीं हारी
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली आशा का जीवन संघर्षों की मिसाल है। जब वह महज 2 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया था। मां राजू बाई ने सीमित संसाधनों में उनकी परवरिश की। तमाम अभावों के बावजूद आशा ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर एक सफल एथलीट और पर्वतारोही के रूप में पहचान बनाई। इस दौरान उन्होंने पिछले अभियान में साइकिल उपलब्ध कराकर मदद करने के लिए सीसीएल प्रबंधन का आभार भी जताया।
युवाओं को दिए सफलता के मंत्र
आशा ने खेलगांव (होटवार) स्थित जेएसएसपीएस परिसर में 'सीसीएल के लाल-लाड़ली' और खेल कैडेट्स के साथ संवाद किया। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता के लिए अनुशासन, फिटनेस और दृढ़ संकल्प सबसे जरूरी हैं।
आशा मालवीय का सफर
अनुभव : अब तक विभिन्न अभियानों के जरिए 64,000 किलोमीटर से अधिक की साइकिल यात्रा पूरी कर चुकी हैं।
उपलब्धियां : प्रख्यात पर्वतारोही होने के साथ ही 100 और 200 मीटर स्प्रिंट में नेशनल लेवल की एथलीट हैं।
लक्ष्य : वर्तमान यात्रा के माध्यम से देशभर में महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रभक्ति का अलख जगाना।

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