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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि टाटा और झारखंड का रिश्ता सवा सौ साल पुराना है। टाटा समूह ने अपना सफर यहीं से शुरू किया था और आज यह देश की प्रगति का इंजन बना हुआ है। अब यह साझेदारी नए युग की तकनीक के साथ और मजबूत होगी।
टाटा के निवेश का 'रोडमैप'
टाटा सन्स के चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि अब निवेश का तरीका पारंपरिक न होकर भविष्य की जरूरतों (Future Tech) पर आधारित होगा:
* नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्री: राज्य में सूचना और ज्ञान आधारित उद्योग लगाने के लिए सरकार और टाटा के अधिकारियों की एक स्पेशल टीम बनेगी।
* ग्रीन एनर्जी: टाटा स्टील में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई तकनीक आएगी। हाइड्रोजन बेस्ड वाहन निर्माण संयंत्र पर भी काम होगा।
* स्किल डेवलपमेंट: राज्य के युवाओं को ग्लोबल डिमांड के हिसाब से तैयार करने के लिए टाटा समूह 'स्किलिंग पार्टनर' बनेगा।
* CSR का विस्तार: टाटा समूह झारखंड में अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड में बढ़ोतरी करेगा, ताकि स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिले।
झारखंड में निवेश के लिए आज बेहतरीन माहौल है। मुख्यमंत्री का विजन और औद्योगिक रोडमैप निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। हम यहाँ नई तकनीक और कौशल विकास में बड़ी भूमिका निभाएंगे। -एन. चंद्रशेखरन, चेयरमैन, टाटा सन्स
जमशेदपुर से आगे बढ़ेगा दायरा
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि टाटा मोटर्स और टाटा स्टील जैसी दिग्गज इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया को पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा। चेयरमैन ने कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से अब नई तकनीक वाले प्लांट लगाए जाएंगे, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
तीन बड़े टेक-अवे
* साझेदारी : युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए सरकार और टाटा मिलकर काम करेंगे।
* आधुनिकीकरण : पुराने प्लांट में नई मशीनों और AI आधारित तकनीक का निवेश होगा।
* पर्यावरण : हाइड्रोजन फ्यूल जैसे क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी।

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