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| मुआवजे का चेक वितरण करते न्यायाधीश। |
अमित सहाय| गिरिडीह
झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा ऑनलाइन उद्घाटन के बाद शनिवार को गिरिडीह व्यवहार न्यायालय में वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मार्तंड प्रताप मिश्रा, कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश धनंजय कुमार और अन्य न्यायिक पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
13 बेंचों में हुआ मामलों का निष्पादन
लोक अदालत की सफलता के लिए गिरिडीह न्यायमंडल में कुल 13 पीठों (बेंच) का गठन किया गया था। इसमें कुल 75,174 मामलों का निष्पादन किया गया, जिनमें 70,695 प्री-लिटिगेशन और 4479 लंबित मामले शामिल रहे। इस दौरान कुल 2 करोड़ 96 लाख 73 हजार 236 रुपए की बंदोबस्ती राशि संबंधित पक्षकारों और राजस्व के रूप में विभिन्न विभागों को प्राप्त हुई।
त्वरित न्याय से घटता है अदालतों का बोझ
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मार्तंड प्रताप मिश्रा ने कहा कि नालसा और झालसा के निर्देश पर आयोजित इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाना है। इससे न केवल आम जनता को लंबे मुकदमों से राहत मिलती है, बल्कि न्यायालयों पर बढ़ता बोझ भी कम होता है।
सरकारी योजनाओं का भी मिला लाभ
लोक अदालत के दौरान न्यायिक और प्रशासनिक समन्वय की अनूठी मिसाल देखने को मिली। जिला प्रशासन के सहयोग से विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत परिसंपत्तियों का वितरण किया गया और लाभुकों को लाभान्वित किया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के सचिव सफदर अली नैयर ने किया। इस अवसर पर जिले के उपायुक्त समेत कार्यपालिका के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य आंकड़े एक नजर में
* कुल निष्पादित मामले: 75,174
* प्री-लिटिगेशन मामले: 70,695
* लंबित मामले: 4,479
* कुल सेटलमेंट राशि: ₹2,96,73,236
* गठित बेंच: 13

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