GA4-314340326 सिकिदिरी जलविद्युत परियोजना के यूनिट दो से एक साल बाद बिजली उत्पादन शुरू

सिकिदिरी जलविद्युत परियोजना के यूनिट दो से एक साल बाद बिजली उत्पादन शुरू

angara(ranchi) सिकिदिरी जलविद्युत परियोजना के पावर हाउस दो से रविवार से एक साल बाद बिजली उत्पादन शुरू हुआ। पावर हाउस एक से 16 फरवरी से ही बिजली उत्पादन किया जा रहा है। लेकिन उस दिन आये कुछ तकनीकी खराबी के कारण पावर हाउस दो से बिजली उत्पादन शुरू नही हो पाया था। पावर हाउस दो को ठीक करने को लेकर परियोजना प्रबंधक संजय सिंह व इनकी टीम लगातार प्रयासरत थी। आज परियोजना प्रबंधक संजय कुमार सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता(वरीय प्रबंधक, यांत्रिक संरक्षण), प्रकाश कुमार दास(वरीय प्रबंधक, विद्युत संरक्षण), प्रदीप कुमार साहू, अनुराग आशीष, रणधीर कुमार तीनों (प्रबंधक, तकनीकी) ने दोपहर ढाई बजे स्वीच आन कर पावर हाउस दो से बिजली उत्पादन शुरू किया। ज्ञात हो कि 6 मार्च 2025 को पावर हाउस एक के पास ट्रेस रेक टूट गया था। जिससे बिजली उत्पादन ठप्प हो गया। परियोजना प्रबंधक संजय सिंह ने बताया कि वर्तमान में गेतलसूद डैम का जलस्तर साढ़े 31 फीट है। इसलिए फिलहाल चौबीसों घंटा बिजली का उत्पादन किया जाएगा।    

क्या है ट्रेस रेक..

ट्रेस रेक बिजली उत्पादन के लिए पानी छोड़ने का एक प्रमुख साधन है। इसका निर्माण 1976 में किया गया था। समय समय इसका रिपेयर होता रहा है। बिजली उत्पादन के दौरान ट्रेस रेक में दोनों तरफ से 2000 क्यूसिक पानी का प्रेशर रहता है। ट्रेक रेक का लाइफ पूर्ण हो गया था जिस कारण मार्च माह में अचानक से टर्बाइन बंद करने के दौरान पानी के प्रेशर से यह धवस्त हो गया। ट्रेस रेक का सिविल स्ट्रक्चर व जाली टूट गया। जिस कारण पानी का ठहराव बंद हो गया। परियोजना निर्माण के समय इसका लाइफ 30-35 साल बताया गया था। चूंकी सिकिदिरी में एक ही सीरिज में एक ही पानी से दो जगहों सिकिदिरी घाटी स्थिति पावर हाउस एक व हुंडरू फाल स्थित पावर हाउस दो से बिजली का उत्पादन करती है। दोनों जगहों पर 65-65 मेगावाट कुल 130 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। ट्रेस रेक पानी के मेन लाइन में है इसलिए इसके क्षतिग्रस्त होने से दोनों जगहों से बिजली का उत्पादन ठप्प् हो गया।     

पचास साल पुराना है डिजाइन

पचास साल पुराने ट्रेस रेक के डिजाइन को मरम्मत कराने के लिए परियोजना को काफी मशक्कत करना पड़ा। परियोजना के पास इसका कोई डिजाइन नही था। डिजाइन के लिए आईआईटी रूड़की, आईएसएम धनबाद, एनआईटी जमशेदपुर, बीआईटी मेसरा, मुंबई सहित अन्य उच्च तकनीकी संस्थान से विस्तृत चर्चा के उपरांत आईआईटी रूड़की को कंसलटेंट नियुक्त् किया गया।

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