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| निरीक्षण के दौरान पूछताछ करते आयोग के सदस्य। |
कुपोषित बच्चों के लिए निर्देश
प्रभारी अध्यक्ष ने केंद्र में मूलभूत सुविधाओं, बच्चों की उपस्थिति और राशन की गुणवत्ता की जांच की। उन्होंने निर्देश दिया कि:
* जो बच्चे अंडा नहीं खाते, उन्हें विकल्प के तौर पर मौसमी फल दिए जाएं।
* स्कूलों और केंद्रों में मेन्यू का दीवार लेखन (वॉल पेंटिंग) सही ढंग से कराया जाए।
* कुपोषित बच्चों को 'कुपोषण उपचार केंद्र' (MTC) में भर्ती करने के लिए उनकी माताओं को प्रेरित करें।
15 दिनों में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
परिसदन भवन में अधिकारियों के साथ 'झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष' की समीक्षा बैठक हुई। प्रभारी अध्यक्ष ने लंबित शिकायतों की सूची अधिकारियों को सौंपते हुए 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग को भेजने का निर्देश दिया। स्कूल निरीक्षण में मिली अनियमितताओं पर जिला शिक्षा अधीक्षक को फटकार लगाते हुए पूरे जिले के स्कूलों की जांच के आदेश दिए गए। बैठक में निर्देश दिया गया कि निगरानी समिति नियमित रूप से बैठक कर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जुड़े मामलों का निपटारा करे।
प्रमुख फैसले: पंचायत कोष में रहें 10 हजार रुपए
* आकस्मिक राशन: झारखंड सरकार के प्रावधान के तहत आकस्मिक खाद्यान्न कोष से बाजार दर पर 10 किलो राशन उपलब्ध कराया जाएगा।
* फंड सुनिश्चित करें: सभी पंचायतों में आकस्मिक राशन के लिए 10 हजार रुपए की राशि उपलब्ध रहे, यह सुनिश्चित करने के निर्देश बीडीओ को दिए गए।
* राशन कार्ड शुद्धिकरण: मृत या अयोग्य व्यक्तियों के नाम काटकर योग्य लाभुकों को राशन कार्ड से जोड़ें।
* व्हाट्सएप नंबर: जिले की सभी पीडीएस दुकानों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में आयोग का व्हाट्सएप नंबर अनिवार्य रूप से अंकित कराएं।
बैठक में ये रहे मौजूद: अपर समाहर्ता (जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी), नगर आयुक्त, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक सहित विभिन्न प्रखंडों के बीडीओ और आपूर्ति पदाधिकारी उपस्थित थे।

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