GA4-314340326 सिल्ली: सरकारी 'गुरुजी' को सुदूर गांवों से परहेज: शहर की सुख-सुविधा के लिए बच्चों का भविष्य दांव पर, 22 में से लौटे सिर्फ 5

सिल्ली: सरकारी 'गुरुजी' को सुदूर गांवों से परहेज: शहर की सुख-सुविधा के लिए बच्चों का भविष्य दांव पर, 22 में से लौटे सिर्फ 5

  अनूप महतो/ सिल्ली (रांची): रांची जिले के सरकारी स्कूलों में नियुक्त कई शिक्षकों के लिए सुदूरवर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना सजा जैसा लगता है। गांवों के धूल-धक्कड़ और खराब रास्तों से बचने के लिए ये शिक्षक जुगाड़ के सहारे राजधानी या राजधानी से सटे कार्यालयों और स्कूलों में अपनी प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) कराकर मौज काट रहे हैं। शिक्षकों के इसी 'शहरी मोह' ने सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण स्कूलों को शिक्षा के मंदिर से खाली कमरों में तब्दील कर दिया है।

हैरानी की बात यह है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद ने 17 दिसंबर 2025 को ही आदेश जारी कर सिल्ली क्षेत्र के उन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति रद्द कर दी थी, जो सालों से मलाईदार पदों पर जमे हैं, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी ये शिक्षक अपने मूल स्कूलों में नहीं लौटे हैं। यह सीधे तौर पर विभागीय आदेश की अवहेलना और अधिकारियों की मिलीभगत का मामला है।

फाइलों में दबा रह गया 'साहब' का आदेश

विभागीय पत्रों के मुताबिक, शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों से प्रतिनियुक्त शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से उनके मूल विद्यालयों में योगदान के लिए विरमित किया जाए, लेकिन आज भी ये शिक्षक जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) रांची, क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक (RDDE) और JCERT निदेशक की छत्रछाया में अपने पुराने ठिकानों पर जमे हुए हैं।

 डीईओ का दावा- आदेश लागू

इस पूरे मामले पर रांची के डीईओ विनय कुमार का कहना है कि शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है और उन्हें मूल विद्यालय में पदस्थापित करने के निर्देश के आलोक में रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

विधायक बोले- अफसरों ने नहीं सुनी तो फिर गूंजेगा सदन 

दूसरी ओर, सिल्ली विधायक अमित महतो ने इस सुस्ती पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि डीईओ ने सभी शिक्षकों का प्रतिनियोजन रद्द कर उन्हें स्कूलों में वापस नहीं भेजा है, तो मैं इस मामले को पुन: विधानसभा में उठाऊंगा। गौरतलब है कि विधायक ने ही 23 सितंबर 2025 को प्राक्कलन समिति के सामने इस धांधली का खुलासा किया था।

दावे के उलट सिर्फ 5 शिक्षक ही लौटे स्कूल 

अफसरों के दावों के उलट सिल्ली क्षेत्र के अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि क्षेत्र के कुल 20 से 22 शिक्षक डेपुटेशन पर बाहर हैं, इनमें से अब तक सिर्फ पांच शिक्षकों ने ही वापस आकर अपने स्कूलों में योगदान दिया है। बाकी शिक्षक अब भी रसूख का इस्तेमाल कर शहरी स्कूलों या दफ्तरों में जमे हुए हैं।

निदेशक के आदेश को ठेंगा दिखा रहे 'साहब'

माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद ने 17 दिसंबर 2025 को ही पत्रांक 4672 के जरिए प्रतिनियुक्ति रद्द करने का आदेश दिया था। लेकिन आज 15 फरवरी हो चुकी है, और डीईओ रांची, RDDE दक्षिणी छोटानागपुर और JCERT निदेशक के स्तर से लापरवाही के कारण यह आदेश फाइलों में दम तोड़ रहा है। उधर, गांवों में जाने से बचने की शिक्षकों की यह प्रवृत्ति और उसे संरक्षण देने वाले अधिकारियों की मिलीभगत सीधे तौर पर गरीब बच्चों के हक पर डाका है। जब शिक्षक स्कूल ही नहीं जाएँगे, तो राज्य की साक्षरता दर कागजों के बाहर कैसे बढ़ेगी?

सालों से प्रतिनियुक्ति पर हैं ये शिक्षक  


डेपुटेशन का दोहरा नुकसान: विद्यार्थी और विभाग दोनों परेशान

शिक्षकों के इस 'शहरी मोह' का सबसे बुरा असर ग्रामीण पढ़नेवाले विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ रहा था। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक स्कूलों से गायब होकर दफ्तरों में फाइलों का काम कर रहे थे । इससे सिलेबस समय पर पूरा नहीं हो पा रहा था और बच्चों का शैक्षणिक स्तर गिर रहा था।

शिक्षकों पर बढ़ा बोझ: एक शिक्षक के बाहर जाने से स्कूल में मौजूद अन्य शिक्षकों पर अतिरिक्त क्लास लेने का दबाव बढ़ गया था, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।

 

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