GA4-314340326 दावोस के मंच पर पहली बार गूंजी झारखंड की आवाज, सीएम हेमंत सोरेन ने रखा 'समृद्ध झारखंड 2050' का विजन

दावोस के मंच पर पहली बार गूंजी झारखंड की आवाज, सीएम हेमंत सोरेन ने रखा 'समृद्ध झारखंड 2050' का विजन

 खनिज निर्यातक नहीं, अब मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा झारखंड; हरित ऊर्जा और सतत विकास पर वैश्विक निवेशकों को न्योता

भारतीय उद्योग परिसंघ की उच्च स्तरीय बैठक में शामिल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 
रांची: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वार्षिक बैठक में झारखंड ने अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को इंडिया पेवेलियन का उद्घाटन किया और वैश्विक मंच से स्पष्ट किया कि झारखंड अब सिर्फ खनिजों और कच्चे माल का निर्यातक बनकर नहीं रहेगा, बल्कि संसाधनों के 'वैल्यू एडिशन' और सतत औद्योगिकीकरण के जरिए नई पहचान बनाएगा।

दावोस से सीएम सोरेन के चार बड़े संदेश

 * सिर्फ खनिज नहीं, अब मूल्य संवर्धन: सीएम ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि उनका जिम्मेदार उपयोग है। हम डाउनस्ट्रीम उद्योगों और हरित प्रौद्योगिकी पर ध्यान दे रहे हैं ताकि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार पैदा हो।

 * समृद्ध झारखंड 2050: विकसित भारत 2047 की तर्ज पर मुख्यमंत्री ने 'समृद्ध झारखंड 2050' का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड पहली बार इस प्रतिष्ठित मंच पर है, जो राज्य के लिए गौरव का क्षण है।

 * क्लाइमेट चेंज और राज्यों की भूमिका: इंटर-मिनिस्टीरियल डायलॉग में सीएम ने जोर दिया कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए राज्यों की भूमिका सबसे अहम है।

 * पर्यटन का नया हब: राज्य की इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक विरासत को निवेश के एक बड़े अवसर के रूप में पेश किया गया।

आदिवासी समाज और समावेशी विकास प्राथमिकता

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के लिए 'सतत विकास' (Sustainability) का अर्थ केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि स्थानीय और आदिवासी समुदायों का कौशल विकास और सामाजिक समावेशन भी है। उन्होंने वैश्विक निवेशकों को जिम्मेदार खनन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया।

वैश्विक दिग्गजों के साथ साझा किया मंच

 * इंटर-मिनिस्टीरियल डायलॉग: स्लोवाकिया के पूर्व वित्त मंत्री वाजिल हुडाक सहित कई वैश्विक नेताओं के साथ समावेशी आर्थिक ढांचे पर चर्चा की।

 * एनर्जी सिस्टम्स: स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विस्तार और नवाचार आधारित वित्तपोषण (Finance) पर अपनी बात रखी।

 * प्रमुख विषय: नवीकरणीय ऊर्जा, भारी वाहन निर्माण (Heavy Vehicle Manufacturing) और बागवानी के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर मंथन हुआ।

हम खनिजों के निर्यातक से आगे बढ़कर सतत विकास के वैश्विक साझेदार बनना चाहते हैं। हमारा उद्देश्य आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन बनाए रखना है। -हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री

क्यों अहम है दावोस में झारखंड की यह भागीदारी?

 * वैश्विक निवेश: पहली बार वैश्विक निवेशकों (Global Investors) के साथ सीधे संवाद से भारी मशीनरी और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश की राह खुलेगी।

 * ब्रांड झारखंड: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की छवि एक 'पिछड़े राज्य' के बजाय 'संसाधन संपन्न और प्रगतिशील राज्य' के रूप में उभरेगी।

 * रोजगार: औद्योगिक विकास और पर्यटन पर जोर देने से राज्य में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

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