GA4-314340326 झारखंड पुलिस को सबसे बड़ी कामयाबी: 1 करोड़ का इनामी नक्सली अनल दा एनकाउंटर में ढेर

झारखंड पुलिस को सबसे बड़ी कामयाबी: 1 करोड़ का इनामी नक्सली अनल दा एनकाउंटर में ढेर

बड़ी स्ट्राइक: तीन दशकों से आतंक का पर्याय था माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य अनल, कई राज्यों की पुलिस को थी तलाश

मिसिर बेसरा उर्फ अनल दा (फाइल फोटो)
रांची: झारखंड में लाल आतंक के खिलाफ सुरक्षाबलों ने अब तक की सबसे बड़ी सफलता हासिल की है। भाकपा माओवादी का शीर्ष नेता और एक करोड़ रुपए का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ अनल दा गुरुवार की सुबह एनकाउंटर में मारा गया है। पुलिस और सुरक्षाबलों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में अनल दा के मारे जाने की पुष्टि हुई है। साथ ही, दस और नक्सलियों के मारे जाने की सूचना मिल रही है।

अनल दा केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के सबसे वांटेड नक्सलियों की सूची में शामिल था। वह संगठन के सर्वोच्च नीति-निर्धारक निकाय (पोलित ब्यूरो) का सक्रिय सदस्य था और पिछले 30 सालों से सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।

 घने जंगलों में हुई आमने-सामने की जंग

सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि अनल दा अपने दस्ते के साथ कोल्हान या सारंडा के जंगलों में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए छिपा है।

 * घेराबंदी: CRPF, कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी की।

 * फायरिंग: खुद को घिरा देख नक्सलियों ने अत्याधुनिक हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी।

 * जवाबी कार्रवाई: सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में अनल दा को गोलियां लगीं और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मौके से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं।

'अनल दा' के खात्मे से नक्सलियों की कमर टूटी

अनल दा माओवादी संगठन का 'थिंक टैंक' माना जाता था। उसके मारे जाने से संगठन को ये तीन बड़े झटके लगे हैं:

 * नेतृत्व का संकट: बूढ़ा पहाड़ और कोल्हान जैसे इलाकों में संगठन को फिर से खड़ा करने की उसकी कोशिशें अब खत्म हो गई हैं।

 * रणनीतिक नुकसान: वह आईईडी (IED) बिछाने और एंबुश लगाने की रणनीति बनाने में माहिर था।

 * कैडर में डर: एक करोड़ के इनामी के मारे जाने से निचले स्तर के नक्सलियों का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा।

अनल दा का क्राइम प्रोफाइल

नाम : मिसिर बेसरा उर्फ अनल दा 

पद : पोलित ब्यूरो सदस्य, भाकपा माओवादी 

इनाम : ₹1 करोड़ (झारखंड सरकार और केंद्र द्वारा) 

केस : हत्या, लेवी वसूली और सुरक्षाबलों पर हमले के 100 से ज्यादा मामले 

इलाका :  झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय |

झारखंड से माओवाद के अंत की शुरुआत?

प्रशांत बोस के बाद अनल दा का मारा जाना झारखंड में माओवाद के ताबूत में आखिरी कील माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में 'ऑपरेशन ऑक्टोपस' और 'डबल बुल' के जरिए पुलिस ने नक्सलियों को उनके सुरक्षित किलों (Safe Havens) से बाहर खदेड़ा है। अनल दा का एनकाउंटर इस बात का संकेत है कि अब राज्य में नक्सलियों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह सुरक्षाबलों के धैर्य और वीरता की जीत है। हम राज्य को पूरी तरह उग्रवाद मुक्त बनाने के संकल्प की ओर बढ़ रहे हैं।

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