लापरवाही की 'रफ्तार': कोर्ट ने माना प्रथम दृष्टया दोषी, आईपीसी की धारा 279 और 304A के तहत तय होंगे आरोप
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| रिनपास की प्रभारी निदेशक डॉ. जयति सिमलाई । |
क्या है पूरा मामला?
* तारीख: 2 मार्च 2022
* घटना: रिनपास के महिला विभाग में इलाजरत मरीज तैरु निशा को डॉ. जयति सिमलाई की कार ने टक्कर मार दी थी।
* आरोप: प्रत्यक्षदर्शियों और शिकायतकर्ता के अनुसार, डॉक्टर सिमलाई परिसर के भीतर काफी तेज और लापरवाही से गाड़ी चला रही थीं।
* नतीजा: हादसे में तैरु निशा गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें रिम्स में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान 14 अप्रैल 2022 को उनकी मृत्यु हो गई।
सच छिपाने की कोशिश: शिकायतकर्ता और झामुमो नेता सोनू मुंडा के अनुसार, इस गंभीर सड़क हादसे को दबाने का प्रयास किया गया था। घटना के बाद इसे एक दुर्घटना के बजाय 'पेड़ से गिरने' का रूप देने की कोशिश की गई। जब मामला सामने आया, तो पुलिस ने जांच (कांड संख्या 198/2022) में साक्ष्य के अभाव का हवाला देते हुए डॉ. सिमलाई को क्लीन चिट दे दी थी।
कोर्ट में कैसे पलटा मामला?
सोनू मुंडा ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी। उनके अधिवक्ता ईशान रोहन ने अदालत में महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने माना कि यह मामला लापरवाही से हुई मौत का है। अब डॉ. सिमलाई पर धारा 279 (सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से वाहन चलाने) और
धारा 304A (लापरवाही के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनना) के तहत केस चलेगा।
पद पर बने रहने से जांच प्रभावित होने की आशंका
फिलहाल डॉ. जयति सिमलाई रिनपास की प्रभारी निदेशक हैं। चर्चा यह भी है कि प्राध्यापक (Professor) न होने के बावजूद उन्हें इस पद की जिम्मेदारी दी गई है। अब कानूनी कार्रवाई शुरू होने के बाद, उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इससे केस प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
आखिर क्लीनचिट के बाद भी कैसे फंस गईं?
* पुलिस की जांच पर सवाल: कांके थाना ने कांड संख्या 198/2022 में डॉ. सिमलाई को निर्दोष बताते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। कोर्ट ने पुलिस की उस रिपोर्ट को दरकिनार कर गवाहों के बयानों को प्राथमिकता दी।
* पद की योग्यता पर चर्चा: डॉ. सिमलाई वर्तमान में प्रभारी निदेशक हैं, जबकि चर्चा है कि वह प्राध्यापक (Professor) के पद पर भी नहीं हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी हैं।
* अगली प्रक्रिया: अब कोर्ट डॉ. सिमलाई को समन जारी कर हाजिर होने का निर्देश देगा, जिसके बाद मामले का ट्रायल (Trial) शुरू होगा।

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