औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गिरिडीह के कारखानों में 'जीरो टॉलरेंस' नीति और कड़े सुरक्षा मानकों की दरकार
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| अस्पताल में इलाजरत मजदूर। |
अलर्ट सिस्टम ने बचाई कई जानें
मंगलवार अहले सुबह कार्बन रिसोर्स फैक्ट्री में जब फर्नेंस ब्लास्ट हुआ, तो फैक्ट्री में लगे तेज आवाज वाले हूटर ने समय रहते सैकड़ों कामगारों को सतर्क कर दिया। हूटर बजते ही मजदूर सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ गए, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई। हालांकि, इस दुर्घटना में एक मजदूर झुलस गया, जिसे तुरंत शहर के नवजीवन नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्यामकिशोर महतो के अनुसार, प्राथमिक उपचार के बाद मजदूर की स्थिति नियंत्रण में है।
सुरक्षा ऑडिट और जवाबदेही पर जोर
लगातार हो रहीं इन घटनाओं के बाद अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि गिरिडीह की औद्योगिक इकाइयों में सेफ्टी ऑडिट नियमित रूप से किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि फर्नेंस और अन्य भारी मशीनों की समय-समय पर तकनीकी जांच अनिवार्य होनी चाहिए। मजदूरों को 'इमरजेंसी इवैक्युएशन' (आपातकालीन निकासी) का नियमित अभ्यास कराया जाए। हेलमेट, फायर प्रूफ जैकेट और अलर्ट सेंसर की उपलब्धता शत-प्रतिशत सुनिश्चित की जाए।

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