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| 13 जनवरी को प्रदेश भाजपा कार्यालय में नामांकन दाखिल करते आदित्य साहू। |
केंद्रीय समिति के लिए कोड़ा दंपति सहित 21 चयनित
प्रदेश अध्यक्ष के अलावा झारखंड से भाजपा की केंद्रीय समिति के लिए 21 नेताओं का चयन किया गया। चयन में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और उनकी पत्नी गीता कोड़ा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। चयनित नेताओं में कड़िया मुंडा, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, मधु कोड़ा, संजय सेठ, अन्नपूर्णा देवी, अभयकांत प्रसाद, प्रो. यदुनाथ पांडेय, पशुपतिनाथ सिंह, रवींद्र कुमार राय, दिनेशानंद गोस्वामी, दीपक प्रकाश, प्रदीप वर्मा, समीर उरांव, अनंत ओझा, गीता कोड़ा, अमर कुमार बाउरी, नीलकंठ सिंह मुंडा, भानुप्रताप शाही और डॉ. जीतूचरण राम शामिल हैं।
जानिए, आदित्य साहू कौन हैं?
आदित्य साहू झारखंड भाजपा के एक कर्मठ और जमीनी नेता माने जाते हैं। उनके बारे में प्रमुख बातों को जानना जरूरी है।
* वर्तमान पद: राज्यसभा सांसद (2022 से) और अब झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष।
* मूल निवासी: वे रांची जिले के ओरमांझी (कुचू गांव) के रहने वाले हैं।
* शिक्षा और करियर: उन्होंने एम.कॉम किया है और राजनीति में आने से पहले वे रामटहल चौधरी कॉलेज में प्रोफेसर थे।
* जातीय समीकरण: प्रो. साहू पिछड़ा वर्ग (OBC) के वैश्य समाज से आते हैं, जो झारखंड की राजनीति में एक बड़ा वोट बैंक है।
इस नियुक्ति के राजनीतिक मायने
* OBC कार्ड: बाबूलाल मरांडी (आदिवासी चेहरा) के बाद भाजपा ने अब एक ओबीसी चेहरे पर दांव खेला है। यह राज्य की बड़ी आबादी को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
* संगठन पर पकड़: आदित्य साहू लंबे समय तक प्रदेश महामंत्री के रूप में संगठन का काम देख चुके हैं। उन्हें राज्य के कोने-कोने में कार्यकर्ताओं के साथ काम करने का गहरा अनुभव है।
* स्वच्छ छवि: साहू की छवि एक बेदाग और अनुशासनप्रिय नेता की रही है, जिससे पार्टी के भीतर गुटबाजी को कम करने में मदद मिल सकती है।
विपक्षी व सहयोगी दलों की प्रक्रिया
मरांडी की विफलता पर मुहर: झामुमो के प्रवक्ता मनोज पांडेय कहा कि भाजपा ने स्वीकार कर लिया है कि बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में वह राज्य में विफल रही है। बार-बार अध्यक्ष बदलना यह दर्शाता है कि भाजपा के भीतर भारी असंतोष और गुटबाजी है। चेहरे बदलने से झारखंड की जनता का भरोसा भाजपा पर नहीं लौटने वाला।
ओबीसी वोट बैंक की राजनीति: कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा को अब आदिवासियों का साथ नहीं मिल रहा, इसलिए वह ओबीसी कार्ड खेलने की कोशिश कर रही है। लेकिन, झारखंड के पिछड़ा वर्ग के लोग जानते हैं कि भाजपा ने उनके आरक्षण और अधिकारों के लिए क्या किया है। आदित्य साहू जी को सिर्फ एक 'मोहरे' की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
गठबंधन के लिए सकारात्मक: भाजपा की सहयोगी आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा कि आदित्य साहू जी एक सुलझे हुए नेता हैं। एनडीए के समन्वय को और मजबूती मिलेगी। हम मिलकर राज्य के मुद्दों पर संघर्ष करेंगे।

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