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| मूर्ति कां अंतिम रूप देता मूर्तिकार |
silli(ranchi) धनतेरस की तिथि नजदीक आने के साथ इसकी तैयारी शुरू हो गई है। दीपावली के दिन पूजा के लिए भगवान लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति धनतेरस के दिन खरीदारी की मान्यता रही है। धरतेरस और दीपावली में माता लक्ष्मी भगवान गणेश की मूर्तियों की बडे पैमाने पर बिक्री होती है। सिल्ली प्रखंड के बंता एक ऐसा गांव है जहां बनाए गए लगभग करोड़ों रुपए मुल्य के मूर्ति की बिक्री झारखंड के विभिन्न जिलों में होती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के भी कई जिलों में यहां के मूर्तियां की काफी मांग है। गणेश लक्ष्मी की मूर्ति के अलावा दीए को भी स्थानीय मूर्तिकारों द्वारा तैयार किया जा रहा है। बंता निवासी मुर्तिकार गुड्डू प्रजापति ने बताया कि कोरोना महामारी की घटना के बाद बदली परिस्थिति में यहां के मूर्ति विक्रेता चीन की मूर्तियों की बिक्री से परहेज कर रहे है। तथा अब लोग भी स्थानीय स्तर पर तैयार मूर्तियों को पसंद कर रहे हैं। दुकानदारों ने भी ऐसी मूर्तियों की बिक्री को तरजीह दे रहे है। यहां के मुर्तिकार सालों भर मूर्ति निर्माण कार्य में लगे रहते हैं।
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