मान्यता है कि कन्याएं देवी का रूप होती है। पुराणों में यह उल्लेख कई स्थानों पर मिलता है कि कुंवारी कन्याओं की पूजा करने, उन्हें वस्त्र, आभूषण आदि दान देने से मनुष्य का हर कष्ट दूर होता है। साथ ही देवी प्रसन्न होती हैं और उस मनुष्य के सामने आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। ईश्वर की आराधना कुंवारी के पवित्र रूप में करने से व्यक्ति के अन्दर आध्यात्म के प्रति अच्छी विचारधारा का विकास होता है। मनुष्य के अन्दर के मनोविकार एवं दुष्ट भावों का नाश होता है और समाज की नारियों के प्रति उसके भाव में पवित्रता आती है। इसी को ध्यान में रखकर नवमी को कुंवारी पूजन किया जाता है। कुंवारी पुजन के पश्चात मंदिर में भोग लगाकर खिचड़ी व खीर महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर दिवाकर प्रसाद, संजय भगत, बबलू साव, नेपाल साव, कुंदन साव, रमेश बड़ाइक, राजु बड़ाइक, मनोज साव, जितु चौधरी, छुटु महतो, बिनोद बिश्वकर्मा, प्रभात गोंझु समेत समिति के सदस्य उपस्थित थे।
silli(ranchi) सिल्ली के लुपुंग महावीर चौक स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में सोमवार को शारदीय नवरात्र के अवसर पर पुजा समिति की ओर से नवमी के दिन हवन व कुंवारी पुजन का आयोजन किया गया। नौ कुंवारी कन्याओं के पैर पुजन कर भोजन कराया गया। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने कुंवारी कन्याओं को उपहार देकर पैर छुए एवं आशीर्वाद लिया। मंदिर के आचार्य ने बताया कि नवरात्र में कुंवारी कन्याओं के भोजन कराने से पुण्य और कल्याण की प्राप्ति होती है।


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