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| वास्तु शास्त्री स्वामी विमलेश |
silli(ranchi) आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा और शरद पूर्णिमा का त्योहार आज मनाया जाएगा। लेकिन चंद्रग्रहण के साये में चंद्रग्रहण के कारण, लोग इस बार शरद पूर्णिमा की मध्य रात्रि को ना ही खीर को ठंडा कर पाएंगे और ना ही इस अमृतरूपी खीर का भगवान के प्रसाद के रूप में उपहार कर पाएंगे. चंद्रग्रहण 28 -29 अक्टूबर की दरम्यानी रात को 1:05 बजे पर शुरू होगा और इसका सूतक काल 28 अक्टूबर को शाम को 4:05 बजे पर लागू होगा। रांची के वास्तु शास्त्री स्वामी विमलेश ने बताया धार्मिक दृष्टिकोण से आज का दिन बेहद ही खास और महत्वपूर्ण है। क्योंकि आज शरद पूर्णिमा है और इस दिन चंद्रमा का विशेष तौर पर पूजन किया जाता है। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी रोशनी से अमृत वर्षा होती है। यदि इस दिन चंद्रमा की रोशनी में कुछ वक्त बिताया जाए तो निगेटिविटी दूर होती है। हालांकि, आज चंद्रमा की पूजा या रोशनी में बैठने का मौका नहीं मिलेगा क्योंकि आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ऐसे में शरद पूर्णिमा का व्रत भी नहीं रखा जाएगा लेकिन सूतक काल लगने से पहले पूजा की जा सकती है।
चंद्र ग्रहण के बाद क्या करना चाहिए
ग्रहणकाल में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी पहने हुए वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए। आसन, गोमुखी व मंदिर में बिछा हुआ कपड़ा भी धो दें । और दूषित औरा के शुद्धिकरण हेतु गोमूत्र या गंगाजल का छिड़काव पूरे घर में कर सकें तो अच्छा है।
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