GA4-314340326 मुड़मा मेले में देश-विदेश से पहुंचे लोग, आज सीएम शामिल होंगे

मुड़मा मेले में देश-विदेश से पहुंचे लोग, आज सीएम शामिल होंगे

धर्म अगुवा का नेतृत्व करते बंधन तिग्गा।

लिंक पर क्लिक कर वीडियो में देखें मेले की झलकियां : सज गया मुड़मा जतरा  

Mandar (Ranchi) : छोटानागपुर का ऐतिहासिक दो दिवसीय मुड़मा राजकीय जतरा सोमवार से शुरू हो गया।शाम करीब तीन बजे पारंपरिक पड़हा व्यवस्था के अनुरूप विधिवत पूजा-अर्चना के साथ मेले की शुरुवात की गई। सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा की अगुवाई में चालीसों पड़हा के पाहन, पुजार, महतो, पनभरा और कोटवार, मुड़मा के गुडु पाहन चालीसों दीया बारे, चालीसों पड़हा के बुलावे... गीत गाते हुए पारंपरिक वेश-भूषा में मुड़मा शक्ति स्थल पहुंचे और लगभग दो घंटे तक पूजा-अर्चना की। साथ एकही, चौबीसों पड़हा के प्रतीक के रूप में कलश पर 24 दीए जलाए गए। इसके बाद मुख्य मंच पर उपस्थित उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि सूबे के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने अन्य अतिथियों के साथ मिलकर जतरा का विधिवत उद्घाटन किया। मेले का मंगलवार को समापन होगा। समापन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन होंगे।

मुड़मा में सांस्कृतिक भवन बनाऊंगा: मरांडी 

 उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए बाबूलाल ने कहा कि हम आदिवासी हैं और हमारी अपनी संस्कृति है, अपनी पहचान है, इस बात का एहसास मुड़मा शक्ति स्थल कराता है। उन्होंने कहा कि यहां सांस्कृतिक भवन बनवाने  का प्रयास करूंगा। चूंकि, यह श्रद्धा का केंद्र है, इसलिए अगर हमारी सरकार बनी तो इनकी सारी मांगे पूरी की जाएगी। मेला आदिवासियों की पहचान है अगर यह मिट जाएगा, तो आदिवासी की पहचान भी मिट जाएगी। प्रकृति की पूजा करें निश्चित रूप से हमारी पहचान दुनिया में बनी रहेगी। 

झारखंड बना, पर आदिवासियों को उनका हक नहीं मिला: सरानिया

वहीं, जतरा में आए असम के कोकराझाड़ से सांसद नबा कुमार सरानिया ने कहा कि हम आदिवासी सरना धर्म को मानते हैं, लेकिन हमको जो सम्मान मिलना था आजादी के बाद अभी तक नहीं मिल पाया है। हम मरते दम तक सरना कोड की लड़ाई के लिए आपके कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। झारखंड बना तो आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन मिलना चाहिए था, लेकिन आज वे इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। अगर, हम इकट्ठा होकर लड़ेंगे तो हमें हर हाल में अधिकार मिलेगा। 

पाहन-पुजार अपने अधिकार और दायित्व को समझें: बंधन 

वहीं, तो धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने  जतरा के इतिहास पर प्रकाश डाला और कहा की यह  जतरा छोटानागपुर का सबसे बड़ा जतरा है। यह स्थान आदिवासियों का एक पवित्र स्थान है, जहां देश-विदेश के लोग आकर पूजा-अर्चना करते हैं। जतरा में आदिवासी-मूलवासी शामिल होते हैं। गांव की समस्याओं का निपटारा पहले अखड़ा में होता था, फिर से उसी ओर लौटने का समय आ गया है, क्योंकि पांचवीं अनुसूची में ग्रामसभा को विशेष अधिकार दिया गया है, जिसे समझना होगा। आदिकाल में जब गांव में किसी समस्या का समाधान नहीं होता था, तो अंत में आदिवासियों का सुप्रीम कोर्ट माने वाले मुड़मा में इसकी सुनवाई और समाधान होता था। धर्म अगुवा पाहन-पुजार अपने अधिकार और दायित्व को समझें और यहां सिर्फ मुड़मा जतरा के दिन नहीं आएं, बल्कि महीने में एक बार जरूर आएं। 

सरना कैलेंडर का विमोचन हुआ 

इससे पहले अतिथियों ने सरना स्थल पर माथा टेका और आशीर्वाद लिया। वहीं, मुख्य मंच से सरना कैलेंडर का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में हटिया विधायक नवीन जायसवाल, लोहरदगा सांसद सुदर्शन भगत, भाजपा के युवा नेता सन्नी टोप्पो, बाबू पाठक, शिव उरांव, जिप सदस्य परमेश्वर उरांव, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के प्रदेश अध्यास रवि तिग्गा, एस अली, साकिर इस्लाही, आबिद अंसारी, शामिल अख्तर आजाद, किशुन उरांव, रंथू उरांव, महादेव उरांव, अनिल उरांव, शिव उरांव आदि मौजूद थे।

तीन आंखों से जतरा की निगरानी

 मुड़मा जतरा में दो दिन के पांच लाख से ज्यादा लोग आते है।इस स्थान से आदिवासियों की आस्था जुड़ी है,यही कारण है कि झारखंड के कोने कोने से तो आते ही है, इसके साथ ही देश विदेश में रहने वाले जनजातीय समुदाय के लोग बड़े उमंग और आस्था के साथ यहां आते है। जतरा में भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है।थाना प्रभारी विनय कुमार यादव के अनुसार पूरे मेला परिसर को पांच भागों में बांटकर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई है। 15 वॉच टावर बनाए गए हैं। वहीं ड्रोन कैमरा से भी निगरानी की जा रही है।1500 पुलिसकर्मी के साथ दो  हजार से अधिक वोलेंटियर जतरा की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था में तैनात किए गए है।

वाहनों का रूट डायवर्ट 

25 पेट्रोलिंग पार्टी हैं, जो दिनभर चारों दिशा में गश्त कर रही है। मुख्य 10 स्थानों को चिह्नित की गई है, जहां विशेष निगरानी की जा रही है। 12 स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। 7 अलग अलग जगह पार्किंग की व्यवस्था की गई है। जतरा में आसपास के क्षेत्रों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं, इसलिए प्रशासन द्वारा सोमवार और मंगलवार को रांची आने-जाने के लिए रूट डायवर्ट किया गया है। रांची जाने वाले भारी वाहनों को मांडर टांगरबसली मोड़ से बेड़ो होते हुए रांची भेजा जा रहा है। जबकि, रांची से आने वाले वाहनों को रातु से ठाकुरगांव बुढ़मू  होते हुए मांडर निकाला जा रहा है। हेवी ट्रैफिक से बचने के लिए दो दिन का यह वैकल्पिक व्यवस्था किया गया है। जतरा के सफल संचालन के लिए स्थानीय और जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हैं।

खाने-पीने से मनोरंजन तक के साधन उपलब्ध 

 मुड़मा जतरा का इंतजार सालभर रहता है। यहां बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक लिए खाने-पीने से लेकर मनोरंजन के तमाम साधन उपलब्ध है। मौत का कुआं,सर्कस,ड्रैगन, बिजली चलित झूले,आर्टिफिशियल बोटिंग,मिक्की माउस,स्लाइड, नाव जैसे चीज मनोरंजन के लिए तो हडुवा, कचरी और सूखा हुआ साग जैसे समान भी मिल रहा है। ईख, बालूशाही मिठाई,और गुपचुप की दुकानें सजी हैं , तो घरेलू उपयोग में आने वाले सिलवट के साथ पारंपरिक हथियार जैसे तलवार, भाला, हॉकी स्टिक की दुकान लगी है।मछली पकड़ने वाला जाल, मांदर, ढोल, नागड़ा की बिक्री भी जोरो से है। जतरा स्थल में एक अस्थाई प्रशासनिक कक्ष बनाया गया है। वहीं पर चिकित्सा शिविर लगा है।

मेले में लगे झूले।

मुड़मा जतरा का फर्जी वॉलेंटियर कार्ड बेच रहा युवक गिरफ्तार 

मांडर पुलिस ने ग्राहक बन कर आरोपी को दबोचा। गिरफ्तार युवक चान्हो के तरंगा का रहने वाला है, वह 200 से 500 रुपए में जतरा में नियुक्त वॉलेंटियर का फर्जी कार्ड बनाकर बेच रहा था। पुलिस को जब इस बात की सूचना मिली तो ग्राहक बनकर उसे मांडर बुलाया और धर दबोचा। पुलिस किसी बड़ी साजिश की आशंका जताते हुए युवक को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ कर रही है।

शक्ति स्थल।

People from India and abroad arrived at Mudma fair, CM will attend today mandar Ranchi Jharkhand 


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