अंसारी बोले- आदिवासियों के विकास में बाधक है अंग्रेजों का यह कानून
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| मुस्तफा अंसारी |
अंग्रेजों के जमाने के कानून की अब जरूरत नहीं
मुस्तफा अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि सीएनटी और एसपीटी एक्ट साल 1908 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया एक पुराना कानून है। देश की आजादी के इतने लंबे अंतराल के बाद अब इस कानून की कोई प्रासंगिकता नहीं बची है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि इसी कानून के प्रावधानों के कारण आज भी आदिवासी समाज विकास की मुख्यधारा से दूर और वंचित बना हुआ है।
जनरल रेट पर जमीन बिकने से मजबूत होगा समाज
सपा नेता ने दावा किया कि सीएनटी/एसपीटी एक्ट से आदिवासियों की जमीनें वास्तव में सुरक्षित नहीं रह पाई हैं, बल्कि इसके बावजूद उनकी खरीद-बिक्री औने-पौने दामों में होती रही है। उन्होंने कहा कि यदि इस कानून को खत्म कर दिया जाता है, तो आदिवासियों की जमीनें 'जनरल रेट' पर बिक सकेंगी, जिससे आदिवासी समाज आर्थिक रूप से स्वावलंबी और मजबूत बन सकेगा।
सरकार के दोहरे रवैये पर सवाल
मुस्तफा अंसारी ने कहा कि इस फैसले से उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भी बड़ी राहत मिलेगी, जो अपनी मेहनत की कमाई से 2 से 5 डिसमिल आदिवासी जमीन खरीदकर किसी तरह अपना जीवन बसर कर रहे हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने हाल के दिनों में आदिवासी जमीन वापसी को लेकर बिगड़ते माहौल पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ छोटे-मोटे जमीन खरीदारों पर कार्रवाई कर उन्हें बेघर कर रही है, जबकि सैकड़ों एकड़ आदिवासी भूमि पर बड़े-बड़े मॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाकर व्यापार करने वाले रसूखदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

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