अमित सहाय / गिरिडीह : भीषण गर्मी में जब तिसरी प्रखंड मुख्यालय के कुएं और चापाकल जवाब दे जाते हैं, तब सीएमआई माइका कंपनी का 16 एकड़ में फैला तालाब हजारों लोगों के लिए वरदान बन जाता है। सुबह से शाम तक यहां पानी भरने वालों की भीड़ लगी रहती है।
दर्जनों मुहल्लों के साथ कई गांवों के लोग दैनिक जरूरतों के लिए इसी तालाब पर निर्भर हैं। शादी-ब्याह से लेकर सरकारी और निजी भवनों के निर्माण तक, रोजाना करीब 100 टैंकर पानी यहीं से भरा जाता है। 10 किलोमीटर दूर तक के लोग मोटर लगाकर टैंकरों में पानी भरकर ले जाते हैं। तालाब की गहराई के कारण गर्मी में भी यह लबालब भरा रहता है, इसलिए लोग इसे 'जीवनदायिनी' कहते हैं।
95 लाख से हुआ गहरीकरण
वर्ष 2019-20 में लघु सिंचाई विभाग गिरिडीह ने 95 लाख रुपये खर्च कर तालाब का गहरीकरण और सफाई कराई थी। मिट्टी भरने के कारण 16 एकड़ का तालाब सिकुड़कर 8 से 10 एकड़ रह गया था। गहरीकरण के बाद यह फिर से अपने पुराने आकार में आ गया है।
1908 में हुआ था निर्माण
इस तालाब का निर्माण 1908 में सीएमआई माइका कंपनी ने कराया था। उस समय कंपनी की फैक्ट्री 112 एकड़ में फैली थी। फैक्ट्री के हजारों मजदूर इसी तालाब से पीने और स्नान का काम करते थे। सुरक्षा के लिए चारों ओर कटीले तार लगे थे और गेट पर ड्रम में पानी रखा जाता था ताकि मजदूर पहले हाथ-पैर धो सकें। बगीचों की सिंचाई के लिए एक दर्जन माली तैनात रहते थे। कंपनी के दिवालिया होने के बाद तालाब अब राज्य सरकार के अधीन है। तिसरी अंचल कार्यालय में आज भी इसका रिकॉर्ड सुरक्षित है।
पर्यटन स्थल बनाने की मांग
स्थानीय लोग अब इस तालाब को पर्यटन से जोड़ना चाहते हैं। तिसरी निवासी राजकुमार शर्मा, सुरेंद्र सिंह और शिवनंदन वर्णवाल का कहना है कि तालाब के आसपास की जमीन पर पार्क और अन्य सुविधाएं बनाई जाएं तो यह क्षेत्र का एक प्रमुख मनोरंजन स्थल बन सकता है।
पानी की किल्लत वाले इलाके में सालभर पानी देने वाला यह तालाब तिसरी वासियों के लिए आज भी सबसे बड़ा सहारा है।

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