GA4-314340326 हाथी हमले के पीड़ितों को 12 दिन में देना होगा मुआवजा

हाथी हमले के पीड़ितों को 12 दिन में देना होगा मुआवजा

सीएम ने अफसरों के साथ की समीक्षा बैठक 

विभागीय अफसरों के साथ बैठक करते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।
रांची : झारखंड में हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ता संघर्ष अब सरकार के लिए चिंता का बड़ा सबब बन गया है। पिछले कुछ महीनों में हाथियों के हमले में 27 लोगों की जान जाने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन विभाग के आला अफसरों की क्लास लगाई। सीएम ने स्पष्ट लहजे में कहा कि 'हाथियों के हमले से अब एक भी मौत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'

मुख्यमंत्री ने कांके रोड स्थित आवास पर शनिवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में विभाग को 'एक्शन मोड' में रहने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मुआवज़े की फाइलें दफ्तरों में धूल नहीं फांकनी चाहिए। अब किसी भी कैजुअल्टी पर 12 दिन के भीतर पीड़ित परिवार के हाथ में मुआवजे की पूरी राशि पहुंच जानी चाहिए।

 बड़ा फैसला: बंगाल या कर्नाटक की तर्ज पर आएंगे 6 'कुनकी' हाथी 

हाथियों के आतंक को कम करने के लिए वन विभाग अब तकनीक और ट्रेनिंग का सहारा लेगा। बैठक में तय हुआ कि:6 कुनकी हाथी मंगाए जाएंगे। ये प्रशिक्षित हाथी जंगली हाथियों को खदेड़ने और ट्रैकिंग करने में मदद करेंगे।

 ग्रामीण बनेंगे 'गज रक्षक': हाथी प्रभावित इलाकों के युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर 'एलीफेंट रेस्क्यू टीम' तैयार की जाएगी। ग्रामीणों को मशाल के लिए डीजल, पुराने टायर, हाई-पावर टॉर्च और सोलर सायरन दिए जाएंगे।

 पिछली सरकार से अब तक का मांगा 'हिसाब' 

सीएम सोरेन ने केवल वर्तमान नहीं, बल्कि पिछले 5 वर्षों का कच्चा चिट्ठा भी मांग लिया है। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि पिछले 5 साल में हुई मौतों और बांटे गए मुआवजे का पूरा डेटा टेबल पर रखें। साथ ही, राज्य के सभी एलीफेंट कॉरिडोर की मैपिंग करने को कहा है ताकि हाथियों के मूवमेंट का स्थायी समाधान निकल सके।

 इन जिलों में 'रेड अलर्ट 

हाथियों का सबसे ज्यादा आतंक रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका में है। हजारीबाग में 5 हाथियों का एक झुंड बेहद आक्रामक हो गया है, जिसे कंट्रोल करने के लिए 70 लोगों की स्पेशल टीम तैनात की गई है।

 हाथी विचरण करते हैं यह पता है, तो विभाग के पास अब तक कोई बेहतर मैकेनिज्म क्यों नहीं है? नियम बदलिए, प्रक्रिया आसान बनाइए और पीड़ितों को तुरंत राहत दीजिए। 

            -हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री

क्या है कुनकी हाथी

आसान भाषा में कहें तो 'कुनकी' हाथी वन विभाग के वे  अनुशासित सिपाही' होते हैं, जिन्हें जंगली और हिंसक हाथियों को काबू में करने के लिए विशेष रूप से ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें हाथियों का पुलिस बल भी कह सकते हैं। ये पूरी तरह से इंसानों (महावतों) के इशारों पर चलते हैं। जब कोई जंगली हाथी (नर हाथी या 'टस्कर') पागल हो जाता है या इंसानी बस्तियों में तबाही मचाता है, तो कुनकी हाथी उसे चारों तरफ से घेरकर शांत करने या जंगल में वापस खदेड़ने का काम करते हैं। इसके अलावा पकड़े गए नए जंगली हाथियों को पालतू बनाने और उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए भी कुनकी हाथियों का सहारा लिया जाता है। रेस्क्यू के दौरान जब डॉक्टर जंगली हाथी को 'ट्रैंक्विलाइजर गन' (बेहोशी की दवा) से निशाना लगाते हैं, तब कुनकी हाथी डॉक्टर और टीम को सुरक्षा प्रदान करते हैं ताकि जंगली हाथी उन पर हमला न कर दे।



 

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