silli(ranchi) सिल्ली आसपास क्षेत्रों में बुधवार को बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा का त्यौहार मनाया जाएगा। पूजा की तैयारियां अब अंतिम चरण में है। क्षेत्र के विभिन्न मूर्तिकार के द्वारा विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मूर्तिकारों ने बताया कि पहले की अपेक्षा वर्तमान में मूर्तिकारों की स्थिति दयनीय है। हालांकि, पुरानी परंपरा को आज भी आगे बढ़ाने का काम वे कर रहे हैं, लेकिन लागत और मेहनत के अनुसार मुनाफा नहीं मिल पाता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि मूर्ति निर्माण के बाद उसकी बिक्री नहीं हो पाती है। सिल्ली बजार स्थित आदि दुर्गा मंदिर में मुर्गी बना रहे मूर्तिकार जितेंद्र रक्षित ने बताया कि पूरे वर्ष मूर्तिकारों को काम नहीं मिलता है। जिस कारण अपने परिवार के जीवनयापन के लिए अन्य काम भी करने पड़ते हैं। सरस्वती पूजा को लेकर एक माह पूर्व से मूर्ति बनाने का काम शुरू किया गया है। 14 फरवरी को होने वाले सरस्वती पूजा के लिए मूर्तियों को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। बताया कि इस बार पहले की अपेक्षा मूर्तियों के लिए अग्रिम बुकिग अधिक हुई है। जिसमे 500 रुपए से लेकर 12 हजार रुपए तक की छोटे बड़े 150 मूर्तियों की बुकिंग हो चुकी है। समय पर मूर्ति तैयार करने के लिए इसबार कई अन्य लोगों को भी रंग रोगन के लिए लगाया गया है।
सरस्वती पूजा कल, मूर्ति को अंतिम रूप देने में लगे हैं मूर्तिकार
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