ओमप्रकाश सिंह /rahe(ranchi) अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पूरे विश्व में मनाया जा रहा है 11 अक्टूबर का दिन बेहद खास है इस दिन गर्ल चाइल्ड यानी बेटी के अधिकारों की बात वैश्विक स्तर पर उठाई गई थी साल 2012 से इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे मनाना शुरू किया गया था बच्चियों को अधिकार और संरक्षण की बात किया जाता है। राहे झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय की वार्डन परमेश्वरी कुमारी ओर लेखापाल सौरभ कुमार सिंह ने सचमुच ही बालिका को अधिकार देने का काम किया है। प्रखंड के सोसो बिरहोर टोली में 60 परिवार विलुप्त हो रहे है आदिम जनजाति बिरहोर के रहते है। इस समुदाय के एक पुरुष मैट्रिक पास है बाकी कोई भी पुरुष या महिला मैट्रिक तक नही पढ़ा है। पिता चैता बिरहोर के निधन के बाद दो बिरहोर बच्चियों का नामांकन झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय में किया गया। कक्षा 9 में सुमन बिरहोर और कक्षा 8 में सनम बिरहोर का नामांकन कराया गया। लेकिन दोनों तीन माह पूर्व घर आने के बाद स्कूल नहीं गई। स्कूल की वार्डेन परमेश्वरी कुमारी ने कई बार व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया लेकिन वो विद्यालय नही आ रही थी और जंगल की ओर जाकर छुप जाती थी। बालिका दिवस पर वार्डेन परमेश्वरी कुमारी और लेखापाल सौरभ कुमार सिंह ने घर जाकर दोनों छात्राओं की मां माधुरी तुरी और बच्चियों को काफी समझाया और कहा कि उक्त छात्राओं की पढ़ाई इंटर तक विद्यालय में होगी जिससे इन छात्राओं का भविष्य उज्ज्वल होगा । वार्डेन ने कहा कि सुमन बिरहोर मेहंदी और खेलकूद में समर कैंप में प्राइज जीत चुकी है छात्राएं स्कूल में रहेगी तो ही इनकी पढ़ाई पूरी हो सकेगी और बिरहोर परिवार का उत्थान हो सकेगा। काफी प्रयास के बाद दोनों का अपने साथ वार्डन ने स्कूल लाई लाई सारे प्रयास में वार्ड सदस्य जगबंधु महतो का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सराहनीय: वार्डन के प्रयास से बिरहोर बच्चियों को लाया गया स्कूल
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