अनगड़ा के हेसातू में जमीन मापी के दौरान जबरदस्त हंगामा: ग्रामीणों के विरोध से खदेड़े गए क्रेता और अधिकारी, सीमांकन रुका

 


सिकिदिरी थाना क्षेत्र के हेसातू गांव में 2.92 एकड़ जमीन की मापी के दौरान हुआ बवाल • मुखिया अनिता बारला और पूर्व मुखिया राजेश पाहन कर रहे थे विरोध का नेतृत्व, अंचल अधिकारी बोले- सभी कागजात वैध, बेवजह विरोध करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई 

angara(ranchi) अनगड़ा प्रखंड के हेसातू राजस्व गांव में सोमवार को जमीन की मापी (सीमांकन) को लेकर जमकर बवाल हुआ। उग्र ग्रामीणों और सिकमी रैयतों के कड़े विरोध के चलते अंचल प्रशासन को बिना सीमांकन किए ही बैरंग लौटना पड़ा। भूखंड के क्रेता व विक्रेता को मौके से खदेड़ दिया गया। इस दौरान मौके पर मौजूद क्रेता पवन लोहिया के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया, जिन्हें बड़ी मुश्किल से सुरक्षित बाहर निकाला गया। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व मुखिया अनिता बारला और पूर्व मुखिया राजेश पाहन कर रहे थे। 

भारी पुलिस बल के बीच पहुंची थी टीम 

अंचल कार्यालय अनगड़ा से मजिस्ट्रेट के रूप में सीआई शशिकांत चौधरी, अमीन और सिकिदिरी थाना पुलिस के अलावा अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर तैनात था। प्रशासन खाता संख्या 2 के प्लॉट नंबर 527, 528, 531, 593 और 895 की कुल 2.92 एकड़ भूमि का सीमांकन करने पहुंचा था। जैसे ही अमीन ने अपनी प्रक्रिया शुरू करनी चाही, आसपास के गांवों के ग्रामीण और सिकमी रैयत बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए और काम का पुरजोर विरोध शुरू कर दिया। हंगामे के कारण टीम चाहकर भी मापी का काम पूरा नहीं कर सकी।

विवेकानंद सोनी ने खरीदी है जमीन 

ज्ञात हो कि उक्त भूखंड को पवन लोहिया से हजारीबाग के चौपारण निवासी विवेकानंद सोनी ने खरीदा है। क्रेता विवेकानंद सोनी के आवेदन पर ही अंचल प्रशासन जमीन का सीमांकन कराने पहुंचा था। 

क्या कहते हैं अंचल अधिकारी? 

मामले को लेकर अनगड़ा के अंचल अधिकारी (CO) राजू कमल ने स्पष्ट किया कि आवेदक विवेकानंद सोनी के आवेदन पर नियमानुसार भूखंड का सीमांकन किया जा रहा था। इसकी सूचना संबंधित पक्ष और ग्रामीणों को पहले ही दी जा चुकी थी। सीओ राजू कमल ने दो टूक शब्दों में कहा, "क्रेता और विक्रेता के पास सभी वैध कागजात मौजूद हैं। अचानक से कुछ लोगों ने आकर विरोध किया और सीमांकन नहीं होने दिया। इस मामले में नोटिस जारी कर सभी ग्रामीणों से उनके दस्तावेज मांगे जाएंगे। अधिकांश लोगों के पास कोई कागजात नहीं है। बेवजह विरोध करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" 

बैकग्राउंड: क्या है हेसातू मौजा का इतिहास? 

हेसातू मौजा में पुराने जमींदार गोविंद राम मारवाड़ी की काफी जमीनें थीं। कई भूखंडों पर लंबे समय से सिकमी रैयतों का कब्जा चला आ रहा है। समय के साथ जमींदार परिवार ने अपनी कई जमीनें अलग-अलग क्रेताओं को बेच दीं। हालांकि, इनमें से कई भूखंडों के स्वामित्व को लेकर लंबे समय से विवाद और खींचतान की स्थिति बनी रहती है। हाल ही में विवेकानंद सोनी को भी इसी जमींदार परिवार से करीब तीन एकड़ जमीन मिली थी, जिसकी मापी के लिए सोमवार को यह प्रशासनिक दल पहुंचा था।

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