मरांग बुरू की धरती से सीएम का आह्वान - संगठित, सशक्त और नशामुक्त बने आदिवासी समाज

 

CM's appeal from the land of Marang Buru - tribal society should become organized, strong and drug-free
महासम्मेलन में शामिल होने जाते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व अन्य।
अमित सहाय / गिरिडीह : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुवार को गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित ‘मरांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन’ में शामिल हुए। संताली भाषा में जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित, सशक्त और प्रगतिशील बनने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार प्राप्त हैं, जिन्हें भारतीय संविधान में भी मान्यता दी गई है। देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां आदिवासी समाज की सहमति और अनुमति के बिना कोई कार्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने महासम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक सहभागिता और आपसी सहयोग जरूरी है। मरांग बुरू धोरोमगाड़ का संरक्षण और देखभाल करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।

आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज है। समाज की जड़ें मजबूत हैं, लेकिन शाखाएं अलग-अलग हो गई हैं। आज समाज के कुछ लोग स्वयं को हिंदू मानते हैं, तो कुछ सरना परंपरा से जुड़ा बताते हैं। लोग जनजातीय भाषाओं के साथ हिंदी भी बोलते हैं। हमारे पूर्वज जंगलों में रहते थे और जंगल ही रोजगार का प्रमुख साधन था। आदिवासी समाज के लिए जंगल भगवान के समान है।

उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो परंपराएं और जीवनशैली दी थी, उसे हम धीरे-धीरे खोते जा रहे हैं। पहले पशुपालन और कृषि आजीविका के प्रमुख साधन थे, लेकिन नई पीढ़ी इनसे दूर होती जा रही है।

अपील... युवा परंपरा को समझें

अपने पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन और माता रूपी सोरेन का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका द्वादशकर्म पारंपरिक विधि-विधान और रीति-रिवाजों के साथ संपन्न किया गया। उन्होंने युवाओं से अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने की अपील की।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया विज्ञान और तकनीक में काफी आगे बढ़ चुकी है। लोग चांद तक पहुंच रहे हैं, लेकिन आदिवासी समाज अभी भी शैक्षणिक, बौद्धिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। समाज के उत्थान के लिए सभी को एकजुट होना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों ने सुदिव्य कुमार सोनू को विधायक बनाया था। उन्हें मंत्री पद देकर क्षेत्र का मान बढ़ाने का प्रयास किया गया, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने झारखंड को अलग पहचान दिलाने और अलग राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य गठन के 25 वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। इसके लिए सभी को विकास की राह पर आगे बढ़ना होगा।

नशाखोरी समाज को कर रही कमजोर

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज में बढ़ती नशाखोरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशे की लत समाज को कमजोर कर रही है। सरकार ने ‘नशामुक्त जीवन हो हमारा’ अभियान के तहत सामूहिक जागरूकता की पहल की है। हड़िया और अवैध शराब के निर्माण व बिक्री पर रोक लगाने तथा इससे जुड़ी महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका देने के लिए फूलो-झानो आशीर्वाद योजना चलाई जा रही है।

उन्होंने लोगों से नशाखोरी छोड़ने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में कई करीबी लोगों के निधन से उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने दिवंगत लोगों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही कहा कि महासम्मेलन के मंच से जो ज्ञापन सौंपा गया है, उस पर न्यायसंगत विचार किया जाएगा।

महासम्मेलन में विधायक सोमेश सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, मरांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू और सचिव विष्णु किस्कू सहित झारखंड के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा असम, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे।

इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मधुबन स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर के हेलीपैड पहुंचने पर प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान आईजी, डीआईजी, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने उनका स्वागत किया।





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