GA4-314340326 गेतलसूद डैम में डूबे मसनिया के विस्थापितों को वन विभाग का नोटिस, आक्रोश; जोरदार विरोध प्रदर्शन

गेतलसूद डैम में डूबे मसनिया के विस्थापितों को वन विभाग का नोटिस, आक्रोश; जोरदार विरोध प्रदर्शन

angara(ranchi)  गेतलसूद डैम के डूब क्षेत्र मसनिया/गांधीग्राम के विस्थापित ग्रामीणों और वन विभाग के बीच भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद गहरा गया है। वन विभाग द्वारा डैम क्षेत्र की जमीन पर अतिक्रमण और अवैध पातन का आरोप लगाते हुए 15 ग्रामीणों को नोटिस जारी किए जाने के बाद विस्थापितों में भारी दहशत और आक्रोश का माहौल है। नोटिस के विरोध में मंगलवार को ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और अनगड़ा के वनपाल नीतिन गुप्ता को आवेदन सौंपकर अपना पक्ष रखा। साथ ही भूमि के स्वामित्व से संबंधित वैध दस्तावेज भी सौंपे। 

क्या है पूरा मामला? ज्ञात हो कि वर्ष 1940 में मसनिया गांव के करीब 54 रैयतों को जमींदार जगरनाथ खुटिया द्वारा हुकुमनामा के माध्यम से एक-एक एकड़ (कुल 54 एकड़) जमीन दी गई थी। वर्ष 1970 में गेतलसूद डैम के निर्माण के समय मसनिया गांव पूरी तरह से डैम में डूब गया। इस दौरान सिंचाई विभाग ने अधिकांश जमीन अधिग्रहित कर ली, जिसे कुछ वर्ष पूर्व पिलर गाड़कर मार्किंग भी कर दिया गया था। बची हुई शेष जमीन पर स्थानीय विस्थापित परिवार पीढ़ियों से खेती-बाड़ी कर अपना जीवनयापन कर रहे है। ग्रामीणों का आरोप है कि विस्थापितों को आज तक उचित मुआवजा और नौकरी नहीं मिली, और अब वन विभाग खाता नंबर 84, प्लॉट नंबर 1108 व 1132 की इस भूमि पर अपना दावा जताते हुए पहली बार डराने-धमकाने की कार्रवाई कर रहा है। 

'2016 में अंचल कार्यालय ने की थी लगान वसूली' विस्थापित प्रतिनिधि देवेन्द्र नाथ गोस्वामी ने बताया कि इसी भूखंड पर लगान वसूली को लेकर वर्ष 2016 में अनगड़ा के अंचल पदाधिकारी (सीओ) द्वारा विस्थापितों को नोटिस जारी किया गया था। लेकिन अब वन विभाग द्वारा अचानक अपनी जमीन होने का दावा करते हुए नोटिस जारी करना समझ से परे है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। 

जनप्रतिनिधियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी 

मामले की सूचना मिलते ही जिला परिषद सदस्य राजेन्द्र शाही मुंडा, भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी रामसाय मुंडा और भाजपा नेता संजय नायक मौके पर पहुंचे और वन विभाग की इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया। जिला परिषद सदस्य राजेन्द्र शाही मुंडा ने दो टूक शब्दों में कहा कि स्थानीय रैयतों ने देश और क्षेत्र के विकास के लिए गेतलसूद डैम को अपनी उपजाऊ जमीनें दीं। बदले में उन्हें आज तक उचित मुआवजा व नौकरी नहीं मिली और अब वन विभाग क्षेत्र में दहशत फैला रहा है। उन्होंने मांग की कि वन विभाग अविलंब इस नोटिस को वापस ले, अन्यथा विस्थापितों द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा। 

वरीय अधिकारियों तक बात पहुंचाने का दिया आश्वासन 

हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बीच वनपाल नीतिन गुप्ता ने ग्रामीणों से आवेदन और दस्तावेज प्राप्त किए। उन्होंने आश्वस्त किया कि पूरे मामले की जानकारी और ग्रामीणों का पक्ष वरीय अधिकारियों तक पहुंचा दिया जाएगा। विरोध प्रदर्शन में ग्राम प्रधान शिवा मुंडा, रामकुमार महतो, कामेश्वर महतो, बाबूराम महतो, सेवाराम महतो, संतोष बैठा, फूलचंद मुंडा, जितेन्द्र महतो, राजेश बैठा, मनीलाल महतो, जग्गू उरांव, अनिल उरांव, महावीर उरांव, प्रमोद बैठा, रामू मुंडा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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