GA4-314340326 श्रावणी मेला : बाबा नगरी में मातृत्व विश्राम गृह बना महिला बमों का सहारा

श्रावणी मेला : बाबा नगरी में मातृत्व विश्राम गृह बना महिला बमों का सहारा

Shravani Mela: Maternity rest house in 'Baba Nagari' becomes a support for female pilgrims.
विश्राम गृह में महिला बम की सेवा करतीं महिलाएं।

देवघर (#novbhaskar): राजकीय श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन-पूजन को उमड़ रही बमों (श्रद्धालुओं) की भारी भीड़ के बीच देवघर जिला प्रशासन  और सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की एक अनूठी पहल महिला श्रद्धालुओं के लिbfMdb ए वरदान साबित हो रही है। मेला क्षेत्र में बनाए गए 'मातृत्व विश्राम गृह' न केवल महिला कांवरियों और माताओं के लिए सुरक्षा व सुविधा का मजबूत कवच बने हैं, बल्कि यहां तैनात महिला कर्मियों की संवेदनशीलता व सेवा भाव ने सभी का दिल जीत लिया है।

10 प्रमुख स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध

मेला क्षेत्र के 10 चिन्हित और महत्वपूर्ण स्थलों पर संचालित इन मातृत्व विश्राम गृहों का मुख्य उद्देश्य महिला श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, स्वच्छ और गरिमापूर्ण माहौल प्रदान करना है।

इन केंद्रों पर उपलब्ध प्रमुख सुविधाएं

बच्चों के लिए : दूध, बिस्कुट, चॉकलेट और पेयजल की चौबीसों घंटे निर्बाध व्यवस्था।

 शिशुओं एवं महिलाओं के लिए : नि:शुल्क डायपर, सेनेटरी पैड और एकांत स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) कक्ष।

स्वास्थ्य एवं प्राथमिक उपचार : थकान और शारीरिक कष्ट को दूर करने के लिए 24 घंटे फर्स्ट एड (प्राथमिक चिकित्सा) की सुविधा।

 महिला कर्मियों ने पैर दबाकर दूर की बमों की थकान

कठिन और सैकड़ों किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा के बाद जब महिला कांवरियां इन विश्राम गृहों में पहुंच रही हैं, तो वहां तैनात महिला सूचना सह सहायता कर्मी उनका स्वागत आत्मीयता से कर रही हैं। कई मौकों पर महिला कर्मियों ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए कांवरियों के पैर दबाकर और उनकी मरहम-पट्टी कर उनके शारीरिक कष्ट को कम किया। बातचीत के दौरान देश के कोने-कोने से आई महिला श्रद्धालुओं ने इस व्यवस्था की जमकर तारीफ की।

पढ़िए, महिला बमों ने क्या कहा...

स्नेहा और कृति बम (भागलपुर, बिहार) : सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने के बाद पैरों और पूरे शरीर में असह्य दर्द था। मातृत्व विश्राम गृह के कर्मियों ने जिस प्रकार आगे बढ़कर हमारा सहयोग और उपचार किया, वह आत्मीयता हम कभी नहीं भूलेंगे।

सुष्मिता हलदर, पूजा बैनर्जी एवं ऐश्वर्या हलदर (कोलकाता, पश्चिम बंगाल) : मेला क्षेत्र में महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड और मासूम बच्चों के लिए नि:शुल्क डायपर की व्यवस्था देखना हमारे लिए एक सुखद आश्चर्य है। जिला प्रशासन की यह सोच बेहद सराहनीय है। 

निकिता और मंजू बम (मेरठ, उत्तर प्रदेश) : भारी भीड़ के बावजूद केंद्र पर तैनात महिला कर्मियों का व्यवहार और सेवा भाव अद्भुत है। उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए हमारे पैर दबाकर जो सहयोग किया, उससे हम अपनी सारी थकान भूल गए। प्रशासन का यह प्रयास सही मायने में अद्भुत है।

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