रांची (#novbhaskar): मोरहाबादी स्थित आवास आज भावनाओं के सैलाब से भरा हुआ था। मौका था झारखंड आंदोलन के महानायक, पद्म भूषण से सम्मानित 'दिशोम गुरु' शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि का। घर के भीतर पसरा सन्नाटा और अपनों को खोने का दर्द हर चेहरे पर साफ झलक रहा था, लेकिन इस आत्मीयता के बीच उनके विचारों का ओज भी उतना ही जीवंत नजर आया।
पिता को नमन करते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।
अपनों की नम आंखें और यादों का संसार
पुण्यतिथि के अवसर पर जब मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बाबा की तस्वीर के सामने पुष्प अर्पित किए, तो उनका गला भर आया। यह सिर्फ एक मुख्यमंत्री का राजकीय कर्तव्य नहीं, बल्कि एक बेटे का अपने पिता को नमन था।
दिशोम गुरु की धर्मपत्नी रूपी सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन की उपस्थिति ने माहौल को और अधिक भावुक बना दिया। परिवार के इन सदस्यों ने जब तस्वीर पर फूल चढ़ाए, तो उनके जेहन में संघर्ष के वे तमाम कठिन दिन ताजा हो गए जो गुरुजी ने इस समाज के लिए जिए थे। बिना किसी औपचारिक दिखावे के, सिर्फ मौन प्रार्थनाओं और नम आँखों से उन्होंने अपने अभिभावक को याद किया और उनके आदर्शों को एक बार फिर अपने भीतर आत्मसात किया।
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| शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करतीं रूपी सोरेन। |
बाबा भौतिक रूप से नहीं हैं, पर उनके विचार अमर हैं
मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि आज भले ही बाबा हमारे बीच भौतिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनका हर एक संघर्ष, उनका विचार और उनका कण-कण योगदान इस झारखंड की मिट्टी में हमेशा अमर रहेगा।
दिशोम गुरु ने अपना पूरा जीवन झारखंड और यहां के शोषितों, वंचितों, आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों की लड़ाई के नाम कर दिया था। आज राज्य के कोने-कोने से आ रही श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि वे सिर्फ हमारे घर के मुखिया नहीं, बल्कि इस पूरे प्रदेश के मार्गदर्शक थे।
अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड वीरों की भूमि है और इस भूमि की अस्मिता की रक्षा के लिए दिशोम गुरु ने जो समतामूलक, न्यायपूर्ण और समृद्ध झारखंड की परिकल्पना की थी, उसे धरातल पर उतारना ही उन्हें हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके देखे गए सपनों को साकार करना आज हम सबकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने झारखंड आंदोलन के उन तमाम वीर शहीदों को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने राज्य के निर्माण में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था।

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