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| निरीक्षण कर के बैडमिंटन कोर्ट से निकलते विधायक अमित महतो। |
विधायक ने की कड़ी नाराजगी जाहिर
निर्माण कार्य की गुणवत्ता को देख विधायक अमित महतो भड़क गए। उन्होंने कहा कि यह भवन झारखंड के 'गुरुजी' (शिबू सोरेन) के नाम पर बन रहा है, लेकिन इसे बनाने में जिस तरह की घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, वह न केवल गुरुजी के नाम का अपमान है, बल्कि जनता के खून-पसीने की कमाई की खुली लूट भी है।
विधायक ने मौके से ही निर्माण में प्रयुक्त ईंटों के सैंपल अपने साथ ले गए और चेतावनी दी कि वे इन ईंटों की लैब में जांच कराएंगे। उन्होंने कहा कि ईंट की मजबूती, वजन और जल सोखने की क्षमता की जांच कराई जाएगी। यदि रिपोर्ट में मानकों के साथ समझौता पाया गया, तो संबंधित ठेकेदार और निगरानी करने वाले इंजीनियरों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई तय है।
ठेकेदार और विभाग की मनमानी
निर्माण स्थल पर भारी अनियमितता के साथ-साथ पारदर्शिता का भी घोर अभाव है। सरकारी नियमों के अनुसार, निर्माण स्थल पर परियोजना की कुल लागत, संवेदक (ठेकेदार) का नाम और कार्य की अवधि का बोर्ड लगा होना अनिवार्य है। लेकिन, काडाकाटा में बन रहे इस भवन के बाहर न तो कोई बोर्ड है और न ही किसी सरकारी पोर्टल या अखबार में इसकी लागत और ठेकेदार का ब्यौरा सार्वजनिक किया गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवन निर्माण में मानकों को ताक पर रखकर लूट मचाई जा रही है। विधायक ने इसे क्षेत्र की जनता के साथ धोखा करार देते हुए कहा कि गुरुजी के नाम पर बन रहे इस भवन के एक-एक पैसे का हिसाब जनता को मिलना चाहिए।
इतिहास गवाह, पहले भी हुई है बंदरबांट
यह पहली बार नहीं है जब इस भवन के निर्माण में विवाद उठा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2011-12 में बैडमिंटन कोर्ट व भवन निर्माण के लिए 5 करोड़ 35 लाख रुपये आवंटित हुए थे। उस समय भवन को अधूरा छोड़कर ही पूरी राशि की निकासी कर ली गई थी।
विवाद तब और गहरा गया जब 6-7 साल बाद उसी अधूरे भवन को पूरा करने के लिए पुनः टेंडर निकाला गया और लागत में ढाई करोड़ रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर दी गई। आरोप है कि उस समय शंकर सिंह और रणधीर सिंह नामक ठेकेदारों ने इसे बनाया था, जिन्हें राज्य के एक प्रभावशाली पूर्व मंत्री का संरक्षण प्राप्त था। स्थानीय लोगों का दावा है कि उस समय इन ठेकेदारों ने स्थानीय मजदूरों को काम देने के बजाय उन्हें धमकी दी और सारा काम बाहर से लाए गए मजदूरों से कराया था।
क्या अब होगी कार्रवाई?
विधायक अमित महतो के कड़े तेवर के बाद अब स्थानीय लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच में दोषी पाए जाने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों पर नकेल कसी जाएगी, या यह मामला भी पिछली बार की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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