गिरिडीह : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पोषण वाटिका' योजना गिरिडीह जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। जिले के करीब 850 आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका विकसित करने के नाम पर 85 लाख रुपये के बंदरबांट का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि बिना काम पूरा किए ही समाज कल्याण विभाग ने फर्जी बिलों के आधार पर धड़ल्ले से भुगतान कर दिया।
आंगनबाड़ी केंद्र।
योजना फेल, बिल पास
योजना के तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को पोषण वाटिका बनाने के लिए 10,000 रुपये आवंटित किए गए थे। आरोप है कि विभाग ने हार्डवेयर, सीमेंट और अन्य दुकानों से मिलीभगत कर फर्जी बिल लगाए। कागजों में पौधे, खाद और बीज की खरीद दिखाकर सरकारी खजाना खाली कर दिया गया, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अधिकतर केंद्रों पर न तो पौधे लगे हैं और न ही घेराबंदी की गई है। ग्रामीण बताते हैं कि न तो कभी बीज आया और न ही वाटिका का निर्माण हुआ, फिर भी राशि का भुगतान हो गया।
अधिकारी की भूमिका सवालों के घेरे में
इस पूरे घोटाले में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। बिना किसी भौतिक सत्यापन या दुकानों की जांच के 85 लाख रुपये का भुगतान सीधे तौर पर बड़ी प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जानकारों का कहना है कि उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी राशि का गबन असंभव है।
उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग
मामले के खुलासे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि दोषी अधिकारियों और संवेदकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, वसूली कर उन केंद्रों में वास्तविक रूप से पोषण वाटिका विकसित की जाए, ताकि वहां आने वाले नन्हें बच्चों को शुद्ध और पोषक आहार मिल सके। फिलहाल, इस मामले में विभागीय कार्रवाई और जांच के आदेश का इंतजार है।
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