GA4-314340326 JJM 2.0 : हर घर जल के लिए झारखंड व केंद्र के बीच MOU

JJM 2.0 : हर घर जल के लिए झारखंड व केंद्र के बीच MOU

सीएम सोरेन बोले- ₹6500 करोड़ का केंद्रांश जल्द दे केंद्र

JJM 2.0: MoU between Jharkhand and the Centre for water supply to every household
एमओयू में आनलाइन शामिल हुए सीएम। 
रांची : जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत झारखंड के हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए झारखंड सरकार और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने की, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची में झारखंड मंत्रालय से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

इस मौके पर झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद और केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री सोरेन ने इस एमओयू को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि राज्य सरकार मिशन मोड में इस योजना का लाभ हर घर तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों और NOC की देरी से आती है बाधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक संरचना मैदानी राज्यों जैसी नहीं है। यहां की ग्रामीण आबादी बड़े पैमाने पर वन क्षेत्रों में बसी है। पाइपलाइन बिछाने और जल स्रोतों के इस्तेमाल के लिए रेलवे, NHAI, DVC और वन विभाग से एनओसी (NOC) लेने में काफी समय लग जाता है, जिससे योजनाएं प्रभावित होती हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि केंद्र सरकार की संस्थाओं से समय पर एनओसी दिलाने में सहयोग किया जाए ताकि कार्य समय पर पूरे हो सकें।

CM ने उठाए वित्तीय मुद्दे: 'काम 55% हुआ, अनुदान सिर्फ 46% मिला'

समीक्षा और संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र के समक्ष राज्य के हक के वित्तीय आंकड़े मजबूती से रखे।

₹6,500 करोड़ की लंबित राशि मांगी : सीएम ने बताया कि वर्ष 2019-20 से राज्य में कुल ₹24,635 करोड़ की पेयजल योजनाओं पर काम चल रहा है। अब तक 55% परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन केंद्र से केवल 46% अनुदान ही मिला है। उन्होंने करीब 6,500 करोड़ रुपये की लंबित सहायता राशि तुरंत जारी करने की मांग की।

फंडिंग रोकने पर जताई चिंता : उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में केंद्र से कोई पर्याप्त धनराशि जारी नहीं की गई है, जिससे स्वीकृत योजनाओं की रफ्तार धीमी होने का खतरा है।

जल सहियाओं के लिए मांगी मदद : सीएम ने कहा कि गांवों में पेयजल व्यवस्था के संचालन के लिए 30 हजार 'जल सहियाओं' को तैनात किया गया है, जिन्हें राज्य सरकार अपने स्तर पर ₹2,500 प्रतिमाह मानदेय दे रही है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि जल जीवन मिशन में 'जल सहिया कंपोनेंट' को जोड़ते हुए इसके लिए वित्तीय सहायता दी जाए।

 बैठक के अन्य महत्वपूर्ण फैसले और शर्तें

झारखंड के लिए ₹2,500 करोड़ आवंटित : JJM 2.0 के तहत झारखंड के लिए विशेष रूप से ₹2,500 करोड़ की राशि आवंटित की गई है, जो मिशन के मानकों का अनुपालन करने पर चरणबद्ध तरीके से जारी होगी।

₹100 करोड़ से ऊपर की योजनाओं की सख्त मॉनिटरिंग :  ₹100 करोड़ से अधिक की लागत वाली बड़ी पेयजल योजनाओं की उच्चतम स्तर पर समीक्षा होगी। साथ ही ₹1,400 करोड़ के ओवरसाइज्ड (तय मानक से बड़े) घटकों की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।

DC करेंगे निगरानी : सभी जिलाधिकारियों (DM/DC) को अपने-अपने जिलों में चल रही जेजेएम परियोजनाओं की सक्रिय निगरानी और समीक्षा करने का टास्क सौंपा गया है।

संयुक्त सचिव संभालेंगे कमान : झारखंड जेजेएम के प्रबंध निदेशक (MD) पद की जिम्मेदारी किसी संयुक्त सचिव रैंक के अधिकारी को सौंपने की सिफारिश की गई है।


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