GA4-314340326 झारखंड राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर: नंबर गेम में पिछड़ने के बाद भी ‘मैनेजमेंट’ से जीते परिमल नाथवानी; क्रॉस वोटिंग को लेकर इंडिया गठबंधन में सिरफुटौव्वल, राजद-माले पर फूटा गुस्सा

झारखंड राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर: नंबर गेम में पिछड़ने के बाद भी ‘मैनेजमेंट’ से जीते परिमल नाथवानी; क्रॉस वोटिंग को लेकर इंडिया गठबंधन में सिरफुटौव्वल, राजद-माले पर फूटा गुस्सा

 

Jharkhand Rajya Sabha elections saw a major upset: Parimal Nathwani won through "management" despite lagging behind in the numbers game; the All India Alliance bickered over cross-voting, anger erupted against the RJD-ML.
जीत के बाद विक्ट्री साइन दिखाते परिमल नाथवानी व अन्य।
अनिल चौधरी / रांची : झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर हुए हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबले का परिणाम बेहद चौंकाने वाला रहा। सत्ताधारी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के पास दोनों सीटें आसानी से जीतने का स्पष्ट बहुमत था, लेकिन एनडीए (NDA) समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के कॉर्पोरेट अफेयर्स डायरेक्टर परिमल नाथवानी ने कांग्रेस का खेल बिगाड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की है। दूसरी सीट पर झामुमो (JMM) के बैद्यनाथ राम उम्मीद के मुताबिक विजयी रहे।

जीत के बाद भाजपा खेमे में जहां "जय श्री राम, हो गया काम" के नारे गूंज रहे हैं, वहीं कांग्रेस खेमे में मायूसी है और उसने सहयोगियों पर ‘धोखेबाजी’ का आरोप लगाया है। इस सियासी उलटफेर के बाद सूबे की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है।

जीत का इनसाइड गणित: कैसे पलटा पूरा गेम

चुनाव की घोषणा के वक्त परिमल नाथवानी की राह बेहद मुश्किल दिख रही थी, क्योंकि जीत के लिए पहली वरीयता के 28 वोटों की जरूरत थी। आइए समझते हैं कि नाथवानी ने हारी हुई बाजी को जीत में कैसे बदला:

 एनडीए के पास थे सिर्फ 24 वोट : भाजपा (21), आजसू (1), लोजपा (रामविलास) (1) और जदयू (1) को मिलाकर एनडीए का कुल आंकड़ा सिर्फ 24 था। यानी जीत के लिए 4 अतिरिक्त वोटों की दरकार थी।

 इंडिया’ गठबंधन में बड़ी सेंधमारी : सत्ताधारी गठबंधन के पास कुल 56 विधायक (झामुमो-34, कांग्रेस-16, राजद-4, माले-2) थे, जो दो सीटें जिताने के लिए काफी थे। लेकिन वोटिंग के वक्त कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को महज 20 वोट मिले।

 क्रॉस वोटिंग का आरोप : कांग्रेस के रणनीतिकारों का आरोप है कि विपक्ष के कुछ विधायकों (विशेषकर राजद और माले) ने गठबंधन धर्म को दरकिनार कर परिमल नाथवानी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की।

 3 वोट हुए अमान्य (Invalid) : चुनाव में कुल 3 वोट रद्द हुए (2 भाजपा और 1 कांग्रेस)। इसके बावजूद नाथवानी मैजिक नंबर पार करते हुए 28 वोटों के साथ जीत गए। वहीं, झामुमो के बैद्यनाथ राम को सर्वाधिक 30 वोट मिले।

नाथवानी की जीत के 3 बड़े राजनीतिक मायने

1. विपक्ष का अभेद्य किला ढहा : इस जीत ने साबित कर दिया है कि झारखंड में ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सहयोगियों और पार्टी के भीतर की यह दरार उजागर हो गई है।

2. एनडीए की रणनीति रही सुपर हिट : चुनाव से दो दिन पहले ही एनडीए ने अपने सभी 24 विधायकों को रांची के रेडिसन ब्लू होटल में शिफ्ट कर दिया था। भाजपा ने अपने कुनबे को एकजुट रखा और विपक्ष के असंतुष्टों को साधने की रणनीति पर काम किया, जो पूरी तरह सफल रही।

3. नाथवानी का निजी प्रभाव : परिमल नाथवानी पहले भी झारखंड से राज्यसभा जा चुके हैं। राज्य के विधायकों के बीच उनकी गहरी पैठ और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संबंध बनाने की कला इस बार भी कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर भारी पड़ी।

नतीजों पर क्या बोले झारखंड के दिग्गज

परिमल नाथवानी (नवनिर्वाचित सांसद): मुझे सभी विधायकों पर पूरा भरोसा था। मैं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर झारखंड के विकास और यहां की जनता की सेवा के लिए हमेशा समर्पित रहूंगा।

बाबूलाल मरांडी (प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा) : यह जीत तय थी। यह कांग्रेस के अहंकार और उनके कुप्रबंधन की हार है। कांग्रेस जमीन से कट चुकी है और उनके अपने ही विधायक और सहयोगी दल उनसे तंग आ चुके हैं। परिमल नाथवानी जी की जीत यह साफ दर्शाती है कि झारखंड के जनप्रतिनिधि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकास मॉडल पर भरोसा करते हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव में भी इनका यही हाल होना तय है।

सुप्रियो भट्टाचार्य (केंद्रीय महासचिव व प्रवक्ता, झामुमो) : झामुमो के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम जी को रिकॉर्ड 30 वोट मिले हैं, जिससे साफ है कि हमारी पार्टी और हमारे विधायक पूरी तरह अनुशासित और एकजुट थे। जहां तक कांग्रेस प्रत्याशी की हार का सवाल है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। दरअसल, कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन के समय ही सहयोगियों को भरोसे में नहीं लिया था, जिसका नतीजा सामने है। गठबंधन के भीतर कहां चूक हुई और किसने किसे वोट दिया, इसकी समीक्षा की जाएगी।

सत्यानंद भोक्ता (वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री, राजद) : कांग्रेस अपनी कमजोरी छुपाने के लिए राजद पर बेवजह ठीकरा न फोड़े। राजद हमेशा से धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। जब गठबंधन के भीतर सीटों और प्रत्याशियों को लेकर कोई समन्वय (Coordination) ही नहीं बनाया गया, तो फिर एकतरफा उम्मीदें क्यों रखी जाती हैं? हमारी पार्टी ने पूरी निष्ठा के साथ काम किया है, कांग्रेस को अपने अंदर झांकना चाहिए कि उसके अपने लोग कहां गए।

राजेश ठाकुर (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस) : यह हमारे साथ सीधा-सीधा विश्वासघात है। संख्या बल के हिसाब से हमारी जीत सौ फीसदी तय थी। हमारे कुछ सहयोगियों ने जो किया है, वह गठबंधन धर्म के खिलाफ है। उन्होंने एनडीए के धनबल के आगे घुटने टेक दिए और पीठ में छुरा घोंपा है। हम उन चेहरों को पहचान चुके हैं जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की। गद्दारों को बख्शा नहीं जाएगा।

विनोद सिंह (केंद्रीय कमेटी सदस्य, भाकपा-माले) : कांग्रेस का यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और हास्यास्पद है। भाकपा (माले) हमेशा से फासीवादी ताकतों और कॉरपोरेट के खिलाफ खड़ी रही है। हमारे विधायकों ने पूरी ईमानदारी से मतदान किया है। कांग्रेस अपनी सांगठनिक कमजोरी, आंतरिक कलह और अपने विधायकों को एकजुट न रख पाने की नाकामी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ रही है। सच यह है कि कांग्रेस के अंदर ही कई विभीषण बैठे हैं।

दीपिका पांडेय सिंह (कांग्रेस मंत्री): यह गठबंधन के साथियों द्वारा पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। हमारे साथ सरासर धोखा हुआ है।

नीरा यादव (भाजपा विधायक): जय श्री राम, हो गया काम! अंतरात्मा की आवाज पर विधायकों ने विकास को चुना है।


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