GA4-314340326 बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में हुआ अलसी बीज प्रसंस्करण केंद्र का शिलान्यास

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में हुआ अलसी बीज प्रसंस्करण केंद्र का शिलान्यास

फोटो: बीएयू में अलसी (तीसी) बीज प्रोसेसिंग केन्द्र का शिलान्यास करते वीसी डॉ एसी दुबे। KANKE,(RANCHI)। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके, रांची में मंगलवार को अलसी (तीसी) बीज प्रोसेसिंग केन्द्र का शिलान्यास हुआ। बीएयू के कुलपति डॉ एससी दुबे ने पश्चिमी सेक्शन में इस प्रोसेसिंग केन्द्र का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि देश और झारखंड अपनी तिलहन आवश्यकताओं के लिए दूसरे देशों से आयात पर निर्भर है। इसको देखते हुए अलसी का उत्पादन, उत्पादकता एवं कृषि क्षेत्र को बढ़ाने के लिए सुनियोजित प्रयास की आवश्यकता है। इसके लिए किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराना जरूरी है। इसका निर्माण लगभग 35 लाख रुपए की लागत कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार तथा आईसीएआर के भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के सहयोग से किया जा रहा है। चार महीने में इसका निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। अलसी बीज हब परियोजना के प्रभारी डॉ नरेश प्रसाद यादव ने बताया कि यह एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है, जो न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि पोषण एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है। इस बीज हब गोदाम एवं प्रोसेसिंग केन्द्र के निर्माण से अलसी बीजों के सुरक्षित भंडारण, संरक्षण एवं वितरण की व्यवस्था सुदृढ़ होगी। इससे बीजों की गुणवत्ता बनी रहेगी, भंडारण के दौरान होने वाली क्षति में कमी आएगी तथा किसानों को समय पर प्रमाणित एवं गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध हो सकेंगे। यह केन्द्र भारत सरकार तथा आईसीएआर द्वारा संचालित तिलहन विकास कार्यक्रमों के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा झारखंड सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा। झारखंड में वर्तमान में लगभग 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में तीसी की खेती होती है जिससे 21 हजार टन उत्पादन मिलता है। राज्य में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता लगभग 610 किलो है। इस अवसर पर आनुवंशिकी एवं पौधा प्रजनन विभाग की अध्यक्ष डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती, निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) डॉ शंभूनाथ कर्मकार, निदेशक (कार्य एवं संयंत्र) मनोज वर्मा तथा आनुवंशिकी विभाग के वैज्ञानिकगण उपस्थित थे।

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