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| जैक बोर्ड की कापी पर ली रही परीक्षा। |
हैरानी की बात यह है कि इन उत्तरपुस्तिकाओं में बकायदा बारकोड और सीरियल नंबर दर्ज हैं, जो किसी भी बोर्ड परीक्षा की अत्यंत गोपनीय सामग्री मानी जाती है।
सरकारी तंत्र पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस मामले के उजागर होने के बाद अब शिक्षा जगत में चर्चाओं का बाजार गर्म है। मुख्य रूप से दो बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
1. गोपनीयता का क्या : क्या इंटरमीडिएट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं का कोई आधिकारिक लेखा-जोखा नहीं होता? बारकोड युक्त कॉपियों का इस तरह खुलेआम इस्तेमाल होना बताता है कि बोर्ड परीक्षाओं के बाद बची हुई सामग्रियों के निष्पादन के लिए कोई पुख्ता नियमावली का पालन नहीं किया जा रहा।
2. संसाधनों का अभाव या खानापूर्ति : क्या विभाग के पास रेल प्रोजेक्ट जैसी महत्वाकांक्षी योजना के लिए साधारण कागज या ओएमआर शीट उपलब्ध कराने के पैसे नहीं हैं, या फिर यह महज कागजी खानापूर्ति के लिए पुरानी कॉपियों को ठिकाने लगाने का जुगाड़ है?
अधिकारियों ने कहा- वापस नहीं जाती कॉपियां
जब इस पूरे मामले पर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO) अक्षय सिन्हा और विद्यालय के शिक्षकों से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने इसे बेहद सामान्य प्रक्रिया बताया। उनका कहना है कि इंटर की परीक्षा के बाद जो कॉपियां बच जाती हैं, उन्हें वापस भेजने का प्रावधान नहीं है। विभाग की ओर से कोई निर्देश न होने के कारण हम इन बची हुई कॉपियों का इस्तेमाल स्कूल के आंतरिक कार्यों और छोटी परीक्षाओं में कर लेते हैं।
सुरक्षा में बड़ी सेंध
विशेषज्ञों का मानना है कि बारकोड वाली कॉपियों का परीक्षा केंद्र से बाहर इस तरह इस्तेमाल होना बोर्ड परीक्षा की सुरक्षा में बड़ी सेंध है। यदि इन कॉपियों का हिसाब-किताब नहीं रखा जाता, तो भविष्य में इनका दुरुपयोग होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और झारखंड एकेडमिक काउंसिल इस मामले पर क्या संज्ञान लेते हैं या फिर 'नियमों के अभाव' की आड़ में इस गंभीर लापरवाही को दबा दिया जाएगा।

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