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| एजेंसी की मनमानी का विरोध करते उपभोक्ता। |
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| कतार में खड़े उपभोक्ता। |
लाइन में गरीब, पीछे के दरवाजे से रसूखदारों को गैस
बुधवार सुबह से ही बड़ी संख्या में महिला और पुरुष उपभोक्ता काडाकाटा स्थित गैस एजेंसी के बाहर कतारबद्ध थे। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से सिलेंडर के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटा दिया जाता है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि:
* स्टॉक होने पर भी इनकार : एजेंसी परिसर में सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, फिर भी आम लोगों को 'गैस खत्म होने' का बहाना बनाया जाता है।
* वीआईपी कल्चर : कतार में खड़े लोगों को नजरअंदाज कर व्यवसायी वर्ग और पैसे वाले लोगों को बिना लाइन के पीछे के रास्ते से सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
* दिहाड़ी का नुकसान : ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोग सुबह से लाइन में लगते हैं, जिससे उनकी मजदूरी प्रभावित हो रही है और आर्थिक चोट पहुँच रही है।
हम सुबह 5 बजे से लाइन में लगे हैं, लेकिन दोपहर होते ही कह दिया जाता है कि स्टॉक खत्म हो गया। जबकि हम देख रहे हैं कि रसूखदारों को बिना किसी दिक्कत के गैस मिल रही है। घर में चूल्हा जलना बंद हो गया है।- करमी देवी, उपभोक्ता
प्रबंधन की लापरवाही से आक्रोश
महिलाओं ने बताया कि गैस न मिलने के कारण घरों में खाना बनाना दूभर हो गया है। एजेंसी प्रबंधन की इस कार्यशैली से न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि आम जनता में प्रशासन के प्रति भी रोष है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि गरीबों को उनका हक मिल सके।
फिलहाल, एजेंसी की ओर से इस हंगामे पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है, लेकिन स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सुधार नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।


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