GA4-314340326 होली के हुड़दंग के बीच सियासी 'खेला': नीतीश कुमार ने खुद किया कन्फर्म 'अब राज्यसभा जाने की बारी'

होली के हुड़दंग के बीच सियासी 'खेला': नीतीश कुमार ने खुद किया कन्फर्म 'अब राज्यसभा जाने की बारी'

पटना : बिहार की सियासत में होली का रंग इस बार 'सियासी लाल' हो गया है। कल यानी होली के दिन जो चर्चा दबी जुबान में शुरू हुई थी, आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने उस पर मुहर लगा दी है। नीतीश कुमार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा की राह पकड़ेंगे।

कल उड़ी थी अफवाह, आज हकीकत बन गई

होली के दिन जब पूरा बिहार रंगों में सराबोर था, तभी राजनीतिक गलियारों में यह खबर तैरने लगी थी कि नीतीश कुमार दिल्ली शिफ्ट हो सकते हैं। उस वक्त इसे 'होली का मजाक' या 'सियासी गपशप' माना जा रहा था, लेकिन आज की पोस्ट ने साबित कर दिया कि खिचड़ी कल से ही पक रही थी।

आखिर होली पर ही क्यों हुआ यह धमाका?

 * रणनीतिक टाइमिंग: छुट्टियों के माहौल में विपक्ष को संभलने का मौका कम मिलता है।

 * भावुक कार्ड: 'पुरानी इच्छा' का जिक्र कर नीतीश ने इसे एक व्यक्तिगत सपने से जोड़ दिया है, ताकि जनता के बीच उनकी छवि एक 'त्यागी' नेता की बनी रहे।

 * नई सरकार का रास्ता साफ: होली के बाद चैत्र नवरात्रि और नए सत्र की शुरुआत के साथ बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।

अगला सीएम कौन? 3 बड़े सवाल 

 * क्या भाजपा का 'मिशन बिहार' शुरू? अगर नीतीश केंद्र में जाते हैं, तो क्या भाजपा पहली बार अपने दम पर बिहार का मुख्यमंत्री बनाएगी?

 * जेडीयू का उत्तराधिकारी कौन? क्या नीतीश अपने पीछे ललन सिंह, विजय चौधरी या बेटे निशांत कुमार में से किसी को कमान सौंपेंगे?

 * राजद का क्या होगा? तेजस्वी यादव इस बड़े बदलाव को 'अवसर' की तरह देखेंगे या एनडीए की नई घेराबंदी में फंस जाएंगे?

 चारों सदनों का सफर तय करनेवाले इकलौते बिहारी 

 नीतीश कुमार लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। अब राज्यसभा जाकर वे अपनी उस इच्छा को पूरा करेंगे, जो उन्होंने कुछ समय पहले एक अनौपचारिक बातचीत में जताई थी।

 


कौन होगा अगला सीएम? रेस में ये नाम सबसे आगे

​नीतीश कुमार के इस फैसले के साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार बिहार की कमान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों में जा सकती है।

* ​सम्राट चौधरी: वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। वे ओबीसी (कुशवाहा) समाज से आते हैं और पार्टी में उनकी मजबूत पकड़ है।

* ​नित्यानंद राय: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी चर्चा में है। वे अमित शाह के करीबी माने जाते हैं और यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा उन पर दांव खेल सकती है।

निशांत कुमार (नीतीश के बेटे): राजनीति में सबसे बड़ा चौंकाने वाला नाम निशांत कुमार का हो सकता है। चर्चा है कि उन्हें नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है ताकि जेडीयू (JD-U) के वोट बैंक को एकजुट रखा जा सके।

बिहार की राजनीति पर क्या होगा असर?

​नीतीश कुमार का सक्रिय राज्य राजनीति से हटना बिहार के लिए एक 'पावर शिफ्ट' जैसा है। इसका असर कुछ इस तरह दिख सकता है:

भाजपा का वर्चस्व: बिहार में पिछले 20 सालों से भाजपा जूनियर पार्टनर की भूमिका में थी। नीतीश के हटने के बाद भाजपा पहली बार राज्य में 'लीड रोल' में आएगी।

* ​जेडीयू का भविष्य: नीतीश के बिना जेडीयू के अस्तित्व और संगठन की मजबूती पर सवाल खड़े हो सकते हैं। क्या पार्टी उनके बेटे निशांत को नेता के रूप में स्वीकार करेगी, यह बड़ा सवाल है।

* ​विपक्ष की रणनीति: राजद (RJD) और तेजस्वी यादव के लिए यह एक बड़ा मौका होगा। नीतीश के हटने से जो राजनीतिक शून्य पैदा होगा, उसे भरने की कोशिश विपक्ष जरूर करेगा।


Post a Comment

please do not enter any spam link in the comment box.

और नया पुराने