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| मृतक संदीप उरांव |
अनिल कुमार चौधरी/ angara(ranchi) अनगड़ा थाना क्षेत्र के हेसल-बाहया रोड में रविवार की शाम साढ़े तीन बजे मिटटी तस्करी करके ले जा रहे एक हाईवा(जेएच02एवाई 3043) ने बाइक सवार युवक अजीत उरांव (24) को कुचल दिया। मौके पर ही अजीत उरांव की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक बोंगाईबेड़ा निवासी लुलु उरांव का पुत्र था। घटना रविवार की शाम करीब चार बजे की है। बाद में मुआवजा की मांग को लेकर हेसल-बाहया रोड को ग्रामीणों ने एक घंटा से अधिक समय तक बंद कर दिया। अनगड़ा थाना प्रभारी गौतम कुमार रजवार के द्वारा 10 हजार रूपया की आर्थिक मदद करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजा गया। बताया जाता है कि अजीत अपने दोस्त की बाइक(जेएच01डीएस 4981) से अपनी भाभी को हेसल चौक छोड़कर वापस अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान गेल आफिस के पास भगत ढीपा के समीप विपरीत दिशा से तेज गति में आ रही उक्त् हाईवा ने ठोकर मारते हुए कुचल दिया। हाइवा में तस्करी करके मिटटी ले जाया जा रहा था। घटना के बाद हाइवा चालक फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही दल बल के साथ अनगड़ा थाना प्रभारी गौतम कुमार रजवार व भाजपा नेता अजय सिंह भोगता, हेसल मुखिया कविता देवी, कुरमी नेता रामपोदो महतो, जेएलकेएम नेता मार्शल महतो, सुरजनारायण महतो, सुधांशु महतो, बाहया ग्रामप्रधान शिवलाल पाहन, बोंगईबेड़ा पंसस संयोती देवी आदि मौके पर पहुंचे। सड़क जाम को हटवाकर पोस्टमार्टम के लिए शव को रिम्स भेजवाया। अनगड़ा थाना की पुलिस ने अवैध मिटटी लदी हाइवा को जब्त कर लिया है।
दो साल से हो रही हेसल वनभूमि से कीमती मिटटी की तस्करी
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| तस्करी करके ले जाया जा रहा मिटटी |
पिछले दो सालों से भी अधिक समय से हेसल स्थित वनभूमि से प्रतिदिन दिन-दहाड़े लगातार मिटटी की तस्करी हो रही है। हेसल व बेड़वारी के दो मिटटी माफिया लगातार जेसीबी लगाकर वनसंपदा मिटटी का अवैध उत्खनन कर तस्करी कर रहे है। प्रतिदिन दो जेसीबी मशीन अवैध रूप से मिटटी उत्खनन में लगी है। मिटटी को तस्करी करके ले जाने के लिए दिन में ज्यादा ट्रीप करने के चक्कर में हेसल-बाहया रोड में हाइवा चालक काफी तेज गति से वाहन चलाते है। लगातार इस रोड में दुर्घटना भी हो रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रतिदिन 50-60 हाइवा मिटटी तस्करी हो रही है। प्रतिदिन लाखों रूपया की मिटटी की तस्करी हो रही है। हेसल में एक सौ एकड़ से ज्यादा वनभूमि है। हेसल वनसंपदा की लाल व सफेट मिटटी अच्छी क्वालिटी की है इसलिए खेत बनाने में भी इसकी ज्यादा मांग है। साथ ही रिंग रोड के आसपास विभिन्न निर्माण क्षेत्रों में मिटटी की लगातार मांग हो रही है। गोंदलीपोखर के आसपास दो से तीन हजार रूपया हाइवा व विकास के आसपास चार से पांच हजार रूपया हाइवा मिटटी बेची जा रही है। चूंकि खेत खराब होने के डर से रैयत अपना जमीन नही देते है इसलिए वनसंपदा का लगातार दोहन हो रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हेसल में ही वनविभाग का डीपो भी है। यहां पर वन अधिकारियों का आना-जाना रहता है। लेकिन आज तक मिटटी तस्करी नही रोकी गई। लगातार हो रही मिटटी के उत्खनन से हेसल वनभूमि का भौगोलिक स्वरूप बदल गया है। मिटटी तस्करी के लिए किये जा रहे उत्खनन से वनभूमि में बड़ा बड़ा गढडा हो गया है। जिससे बारिश के दिनों में इन गडढों में गिरकर मवेशियों की मौत हो रही है।
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