GA4-314340326 Giridih : खाट पर सांसें, नदी में फंसा बचपन : जिस जिले ने झारखंड को तीन शिक्षा मंत्री दिए वहां की है यह तस्वीर

Giridih : खाट पर सांसें, नदी में फंसा बचपन : जिस जिले ने झारखंड को तीन शिक्षा मंत्री दिए वहां की है यह तस्वीर

* तिसरी प्रखंड के हड़हड़ा लेम्बोटांड गांव में न पक्की सड़क, न नदी पर पुल
* बरसात में एम्बुलेंस नहीं पहुंचने पर खाट पर लादे जाते हैं मरीज, स्कूल नहीं जा पाते बच्चे

Giridih: Lives hanging by a thread on a cot, childhood trapped in the river
यह तस्वीर सितंबर 2026 की है, इसमें देखिए स्कूल जाने के लिए छात्राएं कैसे नदीपार कर रही हैं।
अमित सहाय / गिरिडीह: झारखंड में 'आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार' के तमाम दावों के बीच गिरिडीह जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासनिक तंत्र और सरकार के विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती है। जिले के तिसरी प्रखंड की मनसाडीह पंचायत का हड़हड़ा लेम्बोटांड़ गांव  21वीं सदी में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। बरसात की शुरुआत होते ही इस गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है। मनसाडीह ओपी मुख्य मार्ग से हड़हड़ा लेम्बोटांड़ तुरी टोला होते हुए आदिवासी टोला तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह से कच्चा, पथरीला और बड़े-बड़े गड्ढों से भरा है। जर्जर सड़क के कारण कोई भी चार पहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता। गांव में जब भी कोई बुजुर्ग बीमार पड़ता है या किसी महिला को प्रसव पीड़ा होती है, तो 108 एम्बुलेंस मुख्य सड़क पर ही रुक जाती है। परिजनों को मरीज को चारपाई (खाट) पर टांगकर उबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए कई किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पैदल ले जाना पड़ता है।

बारिश आते ही 'टापू' बन जाता है गांव

गांव के बीच से गुजरने वाली नदी पर पक्का पुल नहीं होने से मानसून के दौरान स्थिति विकराल हो जाती है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव पूरी तरह से टापू में तब्दील हो जाता है, जिससे लोग कई दिनों तक अपने ही घरों में कैद रहने को मजबूर हो जाते हैं। लेम्बोटांड़ में उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय (Upgraded Primary School) तो है, लेकिन पक्की सड़क और पुल न होने से बच्चों की पढ़ाई दांव पर लग गई है। उफनती नदी पार करने के खतरे को देखते हुए बारिश के दिनों में माता-पिता बच्चों को स्कूल नहीं भेजते, जिससे स्कूल में उपस्थिति का ग्राफ तेजी से गिर जाता है। यदि हिम्मत करके बच्चे जान जोखिम में डालकर नदी की धारा को किसी तरह से पारकर स्कूल पहुंच भी जाते हैं, तो उन्हें गिले कपड़े में क्लास करना पड़ता है। इस कारण वे सर्दी-खांसी और स्किन डिजीज के शिकार हो जाते हैं। 

जहां से CM की पत्नी हैं MLA, उसी जिले का यह हाल!

यह पूरी स्थिति इसलिए भी बड़े राजनीतिक सवाल खड़े करती है, क्योंकि गिरिडीह जिला राज्य की सियासत में बेहद खास स्थान रखता है। इसी जिले (गांडेय) से राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन विधायक हैं। गिरिडीह जिला तीन-तीन शिक्षा मंत्रियों (चंद्रमोहन प्रसाद, जगरनाथ महतो व सुदिव्य कुमार सोनू) की कर्मभूमि है। इसके बावजूद उत्क्रमित विद्यालय तक जाने के लिए बच्चों को जान जोखिम में डालनी पड़ रही है और स्वास्थ्य सेवाएं खाट के सहारे टंगी हुई हैं।

ग्रामीणों ने नेता प्रतिपक्ष को सौंपा ज्ञापन

प्रशासनिक उपेक्षा से परेशान ग्रामीणों ने एकजुट होकर धनवार विधायक सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी से मुलाकात की और उन्हें अपनी समस्याओं से संबंधित मांग-पत्र सौंपा। ग्रामीणों की मुख्य मांगों में मनसाडीह ओपी मेन रोड से हड़हड़ा लेम्बोटांड तुरी टोला होते हुए आदिवासी टोला तक अविलंब पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। गांव के बीच बहने वाली नदी पर पक्के पुल के निर्माण की तत्काल स्वीकृति दी जाए। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल का निर्माण होने से न केवल उनकी आवाजाही सुगम होगी, बल्कि समय पर इलाज मिलने से जानें बचेंगी और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। अब देखना होगा कि इस राजनीतिक हलचल के बाद सोए हुए प्रशासन की नींद कब खुलती है।



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