angara(ranchi) जिला परिषद सदस्य (अनगड़ा पूर्वी) राजेन्द्र शाही मुण्डा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीईई) कार्यालय, रांची के प्रधान लिपिक दिवाकर सिंह के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। जिप सदस्य ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए जांच अवधि के दौरान उन्हें वर्तमान कार्यालय से हटाने की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2022 में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीइओ) कार्यालय रांची से निलंबन के बाद उनका मुख्यालय हजारीबाग तय किया गया था। आरोप है कि वे निलंबन अवधि में हजारीबाग में महज 3 दिन उपस्थित रहे, लेकिन साठगांठ कर पूरे कालखंड की नियमित उपस्थिति दर्ज करा ली गई। सामान्य प्रशासनिक नियमों के विपरीत, जिस कार्यालय से उनका निलंबन हुआ था, जांच के बाद तत्कालीन आरडीडीई को गुमराह कर उसी डीईओ कार्यालय रांची में पुनः अपनी पदस्थापना करा ली। सिमडेगा जिला में पदस्थापना के दौरान वहां के उपायुक्त(डीसी) एवं जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) द्वारा इनके कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थी। साथ ही दस्तावेजों में फेरबदल के भी आरोप लगे थे। मई-जून 2026 में लिपिकों के तबादलों में भारी अनियमितता का आरोप है। नियमों को दरकिनार कर मनचाहे कार्यालयों में पदस्थापना की गई, जिसमें वर्तमान आरडीडीई की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए है।
स्वयं के हस्ताक्षर से प्रोन्नति व तबादले से राहत:
आरोपी ने अपने हस्ताक्षर से ही खुद का प्रोन्नति आदेश जारी कराया। आमतौर पर पदोन्नति के बाद अन्य जिलों में तबादला किया जाता है, लेकिन स्थापना समिति को गुमराह कर वे उसी कार्यालय में जमे रहे। ग्रेड 3 और 4 के कर्मचारियों के एसीपी व एमएसीपी से जुड़े मामलों को कथित रूप से अवैध राशि (घूस) न मिलने के कारण अकारण लंबित रखने का आरोप है। जिप सदस्य ने पत्र की प्रतियां मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), शिक्षा निदेशक तथा उपायुक्त रांची को भेजकर अविलंब पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है।
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