शेखर / सिमडेगा : जिंदगी कब कौन सा मोड़ लेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इंसान अपने सपनों को पूरा करने के लिए कितनी शिद्दत से कोशिश करता है। सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड की पांच महिलाओं रूपाली समद, अगास्टिन देवी, बंटी कुमारी, करुणा कुमारी और माधुरी कुमारी ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर इरादे मजबूत हों और सरकार का साथ मिल जाए, तो अभावों के अंधकार को चीरकर सफलता का नया सवेरा लाया जा सकता है। इन महिलाओं ने आज अपनी मेहनत और दो बेहद खास सरकारी योजनाओं के दम पर आत्मनिर्भरता की ऐसी इबारत लिखी है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है।
अपनी खुद की दुकान में बैठी महिलाएं।
मुख्यमंत्री सारथी योजना से मिला हुनर का पंख
हर बड़ी सफलता की शुरुआत एक छोटे से कदम से होती है। इन पाँचों महिलाओं के जीवन में वह बदलाव अगस्त 2025 में आया, जब इन्होंने मुख्यमंत्री सारथी योजना (बिरसा) के तहत 'सेल्फ-एम्प्लॉयड टेलर' ट्रेड में कदम रखा।
प्रशिक्षण देने वाली संस्था 'एकदन्ता एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड' ने इन्हें अगले तीन महीनों तक सिर्फ सिलाई ही नहीं सिखाई, बल्कि आधुनिक परिधान निर्माण, कपड़ों की परफेक्ट कटिंग, पैटर्न मेकिंग, फिनिशिंग और सबसे अहम एक छोटा बिजनेस कैसे चलाया जाता है, इन सबका ककहरा सिखाया। यह प्रशिक्षण इन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं था। इसने उनके भीतर छिपी उस क्षमता को बाहर निकाला, जिसके बारे पर शायद वे खुद भी अनजान थीं। अब उनके मन में किसी के यहां नौकरी करने की मजबूरी नहीं, बल्कि खुद का मालिक बनने का आत्मविश्वास पल रहा था।
मंईयां सम्मान योजना ने दी सपनों को रफ्तार
हुनर तो हाथ में आ गया था, लेकिन अपने पैरों पर खड़े होने के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी संसाधनों और पैसों की कमी। सिलाई मशीनें, कैंचियां, कच्चा माल और दुकान के लिए जरूरी साजो-सामान... इन सबके बिना सपना कागजों तक ही सीमित रह जाता।
यहां संकटमोचक बनी झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना। इस योजना से मिली वित्तीय सहायता ने इन महिलाओं के रास्ते की हर रुकावट को दूर कर दिया। उस आर्थिक मदद का सही इस्तेमाल करते हुए उन्होंने सिलाई मशीनें और जरूरी उपकरण खरीदे। और फिर, जलडेगा थाना चौक के पास गूंजी इन महिलाओं के सपनों की धड़कन प्रेमशे टेलर।
अब सिलाई की नहीं, खुद के मुकद्दर की दुकान
आज जलडेगा और आसपास के इलाकों में प्रेमशे टेलर सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण का जीवंत प्रतीक बन चुका है। कुर्ती, ब्लाउज, शर्ट, और स्कर्ट जैसे आधुनिक और मनपसंद कपड़ों की सिलाई के लिए अब लोग इसी दुकान का रुख करते हैं।
हालात यह हैं कि इस प्रतिष्ठान को हर महीने औसतन 20 से 30 शानदार ऑर्डर मिल रहे हैं। समय पर काम और बेहतरीन फिनिशिंग ने ग्राहकों के दिलों में इनकी खास जगह बना ली है। इस छोटे से कारोबार से होने वाली नियमित कमाई ने इन महिलाओं को वह आर्थिक आजादी दी है, जिसके सहारे वे न केवल अपने परिवारों को संबल दे रही हैं, बल्कि समाज में सिर उठाकर गर्व से जी रही हैं।
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