न्यायालय उप श्रमायुक्त
ने लगाया पाँच
गुना मुआवजा; 11 साल
तक सुरक्षाकर्मियों को
मिली आधी पगार
कांके, (रांची): बिरसा
कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू)
में निजी सुरक्षाकर्मियों
के साथ वर्षों
तक हुए वेतन
घोटाले के मामले
में न्यायालय उप
श्रमायुक्त सह नियंत्री
प्राधिकार, रांची ने ऐतिहासिक
फैसला सुनाया है।
सुरक्षाकर्मियों को निर्धारित
न्यूनतम मजदूरी से कम
भुगतान करने के
कारण सिक्योरिटी एंड
इंटेलीजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड
(एसआईएस) एजेंसी और प्रधान
नियोक्ता बीएयू
को संयुक्त रूप
से लगभग ₹1 करोड़
88 लाख की राशि
वसूलने का निर्देश
दिया गया है। प्राधिकार ने इस
राशि की वसूली
के लिए जिला
निलाम पत्र पदाधिकारी,
रांची को कार्रवाई
करने का निर्देश
दिया है।
11 साल तक
आधी मजदूरी, साप्ताहिक
अवकाश भी नहीं
बीएयू के आठ
निजी सुरक्षाकर्मियों ने
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के
तहत वाद संख्या
63/2023 दर्ज कराया था। सुरक्षाकर्मियों
ने आरोप लगाया
था कि उन्होंने
वर्ष 2011 से 2022 तक एसआईएस
के तहत काम
किया, लेकिन एजेंसी
ने उन्हें सरकार
द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी
से लगभग आधी
राशि का ही
भुगतान किया। इस दौरान
उन्हें साप्ताहिक अवकाश भी
नहीं दिया गया। तीनों पक्षों को सुनने
के बाद न्यायालय
उप श्रमायुक्त ने
एसआईएस पर पाँच
गुणा मुआवजा राशि
का दंड लगाते
हुए भुगतान का
निर्देश 30 नवंबर 2024 को दिया
था। लेकिन एजेंसी
द्वारा 60 दिनों में इसका
अनुपालन नहीं किए
जाने पर अब
वसूली की प्रक्रिया
शुरू की जा
रही है। प्रधान
नियोक्ता होने के
कारण बीएयू प्रशासन
को भी इसकी
भरपाई करनी होगी।
100 अन्य सुरक्षाकर्मियों को जगी
उम्मीद
न्यायालय के इस
आदेश से उन
लगभग 100 अन्य सुरक्षाकर्मियों
में उम्मीद की
किरण जगी है
जो भयवश चुप
बैठे थे। यदि
ये सभी भी
न्यायालय की शरण
में जाते हैं,
तो वसूली की
राशि कई करोड़
रुपये तक पहुँच
सकती है।झामुमो नेता सोनू
मुंडा और कांके
प्रखंड अध्यक्ष नवीन तिर्की
ने बीएयू प्रशासन
से **एसआईएस को
वर्तमान टेंडर प्रक्रिया से
तत्काल बाहर करने**
की मांग की
है। उन्होंने आरोप
लगाया कि एसआईएस
ने रिनपास और
सीआईपी जैसे संस्थानों
में भी करोड़ों
का घोटाला किया
है।
टेंडर प्रक्रिया में धांधली
पर भी सवाल
खबर में निजी
सुरक्षा और सफाईकर्मियों
को न्यूनतम मजदूरी
न देने वाली
एजेंसियों की लंबी
सूची पर भी
प्रकाश डाला गया
है। बीएयू के
वर्तमान वीसी डॉ.
सुनील चंद्र दुबे
ने अनियमितता के
लिए समानता
सिक्योरिटी एजेंसी को टेंडर
प्रक्रिया से प्रतिबंधित
किया है। यह भी सामने
आया कि रायडर
सिक्योरिटी जैसी कई
एजेंसियां जेम पोर्टल
पर निलंबित होने
(2026 तक) के बावजूद,
इस तथ्य को
छिपाकर बेखौफ होकर टेंडर
प्रक्रिया में भाग
ले रही हैं।
जानकारों ने टेंडर
जारी करने वाले
विभागों से एजेंसियों
की पृष्ठभूमि की
ईमानदारी से पड़ताल
करने की अपील
की है, ताकि
श्रमिकों को ठगी
का शिकार होने
से बचाया जा
सके।
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