दिखा आस्था का जनसैलाब, इस बार पर्यटन विभाग और शिवरात्रि महोत्सव समिति ने मिलकर किया था आयोजन
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| शिव बारात में निकली झांकी में नंदी पर सवार बाबा भोलेनाथ। |
शिव बारात में सामाजिक संदेश और भक्ति का संगम
डीसी नमन प्रियेश लकड़ा और एसपी सौरभ ने गुब्बारे उड़ाकर बारात को रवाना किया। मौके पर डीसी ने कहा कि शिव समावेशिता के प्रतीक हैं, जहां देवता और दानव दोनों एक साथ चलते हैं। बारात में इस बार पहली बार 12 ज्योतिर्लिंगों के एक साथ दर्शन हुए। शाम 7 बजे स्टेडियम से शुरू हुई यह अलौकिक यात्रा बजरंगी चौक, टावर चौक, आजाद चौक, भैरो बाजार, और चांदनी चौक होते हुए बाबा मंदिर के पूर्वी द्वार तक पहुंची। पूरे रास्ते में चकाचौंध रोशनी और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष से माहौल गुंजायमान रहा। मौके पर डीडीसी पीयूष सिन्हा, एसडीओ रवि कुमार, अपर समाहर्ता हीरा कुमार, नगर आयुक्त रोहित सिन्हा, डीटीओ शैलेश प्रियदर्शी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी राहुल कुमार भारती, जिला खेल पदाधिकारी संतोष कुमार, शिवरात्रि महोत्सव समिति के अध्यक्ष अभिषेक झा, मार्कण्डेय जजवाड़े पुटरू, राज कुमार शर्मा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
देखिए, शिव बारात का फोटो एल्बम
झांकियों में मनोरंजन के साथ कड़ा संदेश
इस बार की शिव बारात केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी केंद्र रही।
* हैकर दैत्य: साइबर ठगी के प्रति लोगों को सचेत करने के लिए बनाई गई इस झांकी ने खूब सुर्खियां बटोरीं।
* नशे का पिंजरा: नशे के दुष्प्रभावों को दिखाते हुए कलाकारों ने संदेश दिया कि व्यसनी व्यक्ति पिंजरे में कैद पंछी की तरह हो जाता है।
* सुलगता मुंड: सबसे अनोखी झांकी, जिसके कान से आग की लपटें और मुंह से धुआं निकल रहा था।
* महिला सशक्तिकरण: विश्व कप विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम की झांकी के जरिए 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का संदेश गूंजा।
* 12 ज्योतिर्लिंग: श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का सौभाग्य मिला।
* लवाजमा: बारात में 50 घोड़े, 15 ऊंट और 250 झंडे शामिल थे। पूरे रूट पर 40 से ज्यादा मंचों पर छऊ और लोक नृत्य की प्रस्तुति हुई।
वीआईपी दर्शन पर थी पूर्ण रोक
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने इस बार मंदिर में वीआईपी और आउट-ऑफ-टर्न दर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। रूट लाइन (बीएड कॉलेज से नेहरू पार्क होते हुए) में श्रद्धालुओं के लिए पानी, शौचालय और सूचना केंद्रों की पुख्ता व्यवस्था थी। डीसी और एसपी खुद रूट लाइन में मुस्तैद रहे, ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।
चतुष्प्रहर पूजा और बाबा का विवाह
महाशिवरात्रि की रात बाबा मंदिर में विशेष चतुष्प्रहर पूजा का आयोजन किया गया। फाल्गुन चतुर्दशी की इस विशेष पूजा में परंपराओं का अनूठा संगम दिखा।
* दूल्हा बने बाबा: सबसे पहले बाबा को गंगाजल, गुलाब जल और पंचामृत (दूध, दही, शहद, शक्कर) से स्नान कराया गया।
* सिंदूर दान: परंपरा के अनुसार, सरदार पंडा ने बाबा के विग्रह पर माता पार्वती के नाम से सिंदूर अर्पित कर विवाह की रस्म संपन्न कराई।
* समय: रविवार सुबह 4:30 बजे से शुरू हुआ जलार्पण रात 9:30 बजे तक चला। इसके बाद विशेष पूजा शुरू हुई जो सोमवार तड़के 3 बजे तक जारी रही।
शिव बारात केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था का जीवंत स्वरूप है। यह शांति, संयम और समानता का संदेश देती है।
- नमन प्रियेश लकड़ा, डीसी, देवघर

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